कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि किसानों को बुवाई की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। जब तक खेतों में कम से कम तीन से चार इंच तक अच्छी नमी न हो जाए, तब तक बीज…और पढ़ें

HighLights
- मानसून की दस्तक
- विलंब के कारण चिंता भी सता रही
- अल्प वर्षा की आशंका
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। अंचल में गुरुवार को मानसून ने दस्तक दे दी है। वर्षा के साथ ही ग्वालियर-चंबल संभाग के किसानों के चेहरे खिल गए हैं और उन्होंने खरीफ फसलों की बुवाई की तैयारियां तेज कर दी हैं। हालांकि पिछले दिनों हुई प्री-मानसून वर्षा के बाद जागरूक किसानों ने अपने खेतों को पहले ही तैयार कर लिया था और धान की नर्सरी भी लगानी शुरू कर दी है। लेकिन इस उत्साह के बीच एक चिंता भी सता रही है।
इस बार मानसून अपने तय समय से थोड़ा विलंब से आया है और मौसम विभाग ने अल्प वर्षा की आशंका जताई है। कम वर्षा की संभावना को देखते हुए वैज्ञानिकों ने किसानों को स्मार्ट फार्मिंग करने यानी कम पानी व कम समय की फसलों की बुवाई करने की सलाह दी है, ताकि यदि कम वर्षा होती है तो उनकी फसलें प्रभावित न हों।
अंचल में वर्षा की स्थिति और चुनौतियां
ग्वालियर और आसपास के क्षेत्रों में मानसून की पहली वर्षा ने जमीन को तर तो किया है, लेकिन कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि किसानों को बुवाई की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। जब तक खेतों में कम से कम तीन से चार इंच तक अच्छी नमी न हो जाए, तब तक बीज नहीं डालना चाहिए। कम वर्षा की स्थिति से निपटने के लिए इस बार अंचल के किसानों को पारंपरिक फसलों के बजाय कम समय में पकने वाली और सूखा-रोधी किस्मों पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
सर्टिफाइड बीज ही खरीदें
हमेशा विश्वसनीय संस्थाओं से ही बीज खरीदें। ग्वालियर संभाग के किसान नजदीकी सहकारी समितियों, कृषि उपज मंडी स्थित सरकारी बीज गोदामों, मप्र राज्य बीज विकास निगम के केंद्रों और राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के बिक्री काउंटरों से प्रमाणित और रियायती दरों पर बीज प्राप्त कर सकते हैं।
क्या कहते है वैज्ञानिक
- मौसम विभाग ने इस बार 10 से 20 प्रतिशत कम वर्षा होने का अनुमान बताया है। इसलिए किसानों को अधिक पानी वाली फसलें जैसे धान की जगह उड़द, मूंग, ज्वार-बाजरा व तिल की बुवाई करना चाहिए। ये फसलें न केवल कम समय में हो जाती हैं, बल्कि पानी भी कम लगता है। इन फसलों के बीज विभिन्न सरकारी संस्थाओं पर उचित कीमतों पर उपलब्ध है। खास बात यह है कि इन फसलों का बाजार मूल्य भी अच्छा मिलता है। -डॉक्टर शैलेंद्र सिंह कुशवाह, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र।
- खरीफ की फसलों में धान को सर्वाधिक पानी की जरूरत होती है। इस बार वर्षा में कमी की आशंका है। इसलिए जिले में धान के रकबे को कम किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को उड़द, मूंग, तिल, ज्वार बाजार की अधिक बुवाई के लिए जागरूक किया जा रहा है। इससे यदि कम वर्षा हो तो उन्हें नुकसान न उठाना पड़े। इन फसलों को जुलाई के अंतिम दिनों तक बो भी सकते हैं और जल्दी काट भी सकते है। -आरबीएस जाटव, उप संचालक कृषि।
