पुलिस जांच में सामने आया कि तृप्ति खुद को आईएएस अधिकारी साबित करने के लिए एआई और फोटो-एडिटिंग टूल का इस्तेमाल करती थी।

HighLights
- एआई और फोटो-एडिटिंग टूल का इस्तेमाल करती थी
- फर्जी सीबीआई आईडी, सरकारी नौकरी के पत्र तैयार किए
- लैपटॉप और डिलीट की गई डिजिटल फाइलों की फोरेंसिक जांच जारी
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। अशोक नगर की चंदेरी पुलिस द्वारा गिरफ्तार 30 वर्षीय तृप्ति सिंह राजपूत की जालसाजी का मामला अब साधारण ठगी से आगे निकलकर एक हाई-टेक डिजिटल धोखाधड़ी का रूप ले चुका है।
कोर्ट में पेशी से पहले रिमांड के दौरान पुलिस को आरोपी के पास से न केवल फर्जी सीबीआई आईडी कार्ड, भारत सरकार लिखी कार और जाली दस्तावेज मिले, बल्कि मसूरी में ट्रॉफी के साथ खिंचवाई गई फर्जी तस्वीरें भी बरामद हुई हैं।
AI के इस्तेमाल की जांच
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या तृप्ति ने अधिकारियों को चकमा देने और लोगों में अपना रसूख कायम करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक फोटो-एडिटिंग टूल का इस्तेमाल किया था।
पुलिस को ऐसी जानकारी मिली है कि तृप्ति एआई के माध्यम से नौकरी के पत्र तैयार करती थी, फिर हटा दिया करती थी। पूछताछ में यह भी पता चला कि तृप्ति खुद को मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग में अतिरिक्त निदेशक बताकर लोगों को सरकारी नौकरी और पर्यटन संपत्तियों की लीज दिलाने के नाम पर ठगी करती थी।
उसने मानव संग्रहालय की गैलरी को मध्य प्रदेश विधानसभा बताकर ब्लॉग बनाया और खुद को आईएएस अफसर के रूप में पेश किया।
चंदेरी में चार युवाओं से नौकरी के नाम पर लगभग 9.80 लाख रुपये और मूल दस्तावेज ऐंठने वाली तृप्ति के लैपटाप और डिलीट की गई डिजिटल फाइलों की फोरेंसिक जांच जारी है।
