भोपाल में आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े सीलिंग मामलों पर हाई कोर्ट में संयुक्त सुनवाई होगी।

HighLights
- साेमवार 7 सितंबर को सीलिंग मामलों पर हाई कोर्ट में संयुक्त सुनवाई
- निगम ने 8200 से अधिक नोटिस दिए,10 संपत्तियां सील की गई हैं
- राहत मिलने पर शहर के कुछ हिस्सों में दोबारा कार्रवाई की जाएगी
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल । आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई पर लगी रोक को हटाने के लिए सात अगस्त को मप्र उच्च न्यायालय में 100 से ज्यादा मामलों की संयुक्त सुनवाई होगी।
निगम ने इन मामलों में स्टे हटाने के लिए आवेदन और लिखित जवाब प्रस्तुत किए हैं। हाई कोर्ट से स्टे हटने पर निगम की सीलिंग कार्रवाई दोबारा शुरू हो सकती है। इनमें चार मामले अधिभोग उल्लंघन से जुड़े हैं। इन मामलों में राहत मिलने पर अरेरा कालोनी और रोहित नगर के कुछ हिस्सों में कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।
मिलेगा 24 घंटे का अल्टीमेटम
अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई से पहले संबंधित संपत्तियों को 24 घंटे का अंतिम अवसर दिया जा सकता है। पांच अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद नगर निगम ने स्टे हटाने के लिए पहले 144 मामलों की सूची तैयार की थी। बाद में यह संख्या 125 और फिर 107 हुई।
निगम सूत्रों के अनुसार, न्यायालय में फिलहाल 101 मामले लंबित हैं। इनमें अवैध अतिक्रमण, स्वीकृत भवन अनुज्ञा के विपरीत निर्माण और ऑक्यूपेंसी से जुड़े मामले शामिल हैं।
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8200 से ज्यादा नोटिस, 10 संपत्तियां सील
नगर निगम अब तक आवासीय परिसरों में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर 8200 से ज्यादा नोटिस जारी कर चुका है। पंचनामों में 170 से अधिक प्रतिष्ठानों के बंद होने की बात दर्ज है, लेकिन निगम ने अब तक केवल 10 संपत्तियों को सील किया है।
इनमें से तीन संपत्तियों में सील तोड़कर दोबारा गतिविधियां शुरू करने की बात सामने आई थी। इन पर अभी आगे की कार्रवाई नहीं हुई है।
मास्टर प्लान को लेकर कांग्रेस का मार्च
इधर, रविवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कोटरा सुल्तानाबाद में पैदल मार्च निकालकर जल्द मास्टर प्लान लागू करने की मांग की। मार्च में पूर्व मंत्री पीसी शर्मा और पार्षद वीनू सक्सेना भी शामिल हुए। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि मास्टर प्लान में देरी से रहवासियों और कारोबारियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
स्टे हटाने के लिए हाई कोर्ट में लिखित जवाब और आवेदन प्रस्तुत किए गए हैं। मामलों में निगम प्रभावी तरीके से अपना पक्ष रख रहा है। – भुवन गुप्ता, उपायुक्त, नगर निगम
