AQ Khan: पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के प्रमुख माने जाने वाले डॉ. अब्दुल कदीर खान का बचपन भोपाल की एक संकरी गली ‘गली रामफल’ में बीता था।

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। यह सुनकर कोई भी चौंक सकता है कि पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम का प्रमुख चेहरा माने जाने वाले डॉ. अब्दुल कदीर खान का बचपन भोपाल की एक संकरी गली में बीता था। पुराने भोपाल के बुधवारा-गिन्नौरी इलाके की यह गली आज भी इतिहास की एक अनकही कहानी अपने भीतर समेटे हुए है। बहुत कम लोग जानते है कि कभी इस इलाके में एक विशाल रामफल का पेड़ हुआ करता था।
पेड़ अब नहीं रहा, लेकिन उसके मीठे फलों को खाने वाले बुजुर्ग और पेड़ का नाम अभी भी यहां मौजूद है। यहां बनी मस्जिद का नाम ही मस्जिद रामफल है। आज पेड़ तो नहीं बचा, लेकिन एक संकरी गली आज भी उसी नाम से जानी जाती है। इसी गली में स्थित एक मकान डा. अब्दुल कदीर खान का पैतृक घर है। उनके कुछ परिजन और उनके कई रिश्तेदार आज भी यहीं इलाके में निवास करते हैं।
विभाजन के समय पाकिस्तान चले गए
इसी गली के निवासी, बीएचईएल से सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पूर्व राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी आगा अब्दुल जब्बार खान बताते हैं, अब्दुल कदीर हमारे चाचा के बेटे थे। उनकी शुरुआती पढ़ाई छोटे तालाब के किनारे स्थित शासकीय हमीदिया गिन्नौरी स्कूल में हुई थी। वे बताते हैं कि वर्ष 1947 में देश विभाजन के समय उनका परिवार पाकिस्तान जाने के पक्ष में नहीं था। हमारे वालिद ने भारत में ही रहने का निर्णय लिया।
कदीर के पिता भी नहीं गए और उनका निधन भी इसी घर में हुआ। अब्दुल कदीर पाकिस्तान चले गए वहां से वे उच्च शिक्षा के लिए विदेश चले गए। वे विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़े और फिर पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ गए।
आज गली रामफल एक ओर उस रामफल के पेड़ की स्मृति को संजोए हुए है, जिसने पूरे इलाके को पहचान दी, तो दूसरी ओर इतिहास के उस अध्याय की भी गवाह है, जहां से एक ऐसा व्यक्ति निकला, जिसने आगे चलकर दक्षिण एशिया की राजनीति और सामरिक संतुलन को प्रभावित किया। पुराने भोपाल की यह संकरी गली आज भी अपने भीतर इतिहास, स्मृतियों और बदलते समय की कई परतें समेटे खामोशी से खड़ी है।
