नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया व न्यायमूर्ति दीपक खोत की युगलपीठ ने बेटी को बंधक बनाकर रखे जाने का आरोप लगाने वाले पिता द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निराकरण कर दिया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट में पेश हुई युवती ने अपने बयान में साफ किया कि जिस युवक पर उसे बंधक बनाने का आरोप लगाया गया है, वह उसका पति है और उसने अपनी इच्छा से उससे विवाह किया है।
दरअसल, मऊगंज निवासी गोविंद कुशवाहा की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में आरोप लगाया गया था कि उनकी बेटी को शिव कुमार कुशवाहा ने बंधक बना रखा है।
पुलिस शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं कर रही है। हाई कोर्ट ने तर्क सुनने के बाद युवती को पेश करने के निर्देश दिए थे।
जिसके पालन में लौर थाना पुलिस युवती को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया। 23 वर्षीय युवती ने बताया कि वह बालिग है, उसे किसी ने बंधक नहीं बनाया है और उसने स्वेच्छा से विवाह किया है।
उसने कहा कि वह अपने पति के साथ रहना चाहती है। कोर्ट ने कहा कि बालिग महिला को अपनी इच्छा के अनुसार जीवन जीने और जीवनसाथी चुनने का पूर्ण अधिकार है।
चूंकि युवती ने स्वतंत्र रूप से पति के साथ रहने की इच्छा व्यक्त की है, इसलिए उसे उसके पति के साथ रहने दिया जाए। इसी के साथ कोर्ट ने याचिका का निराकरण कर दिया।
