कुटुंब न्यायालय के तृतीय अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश मुकेश कुमार दांगी की अदालत ने पति द्वारा गंभीर बीमारी छिपाकर शादी किए जाने के रवैये को अनुचित करार …और पढ़ें

HighLights
- बीमारी छिपाकर शादी करने को अनुचित मानकर तलाक की मंजूरी
- शादी के दो माह बाद खुला राज, पति को पहले से थी मिर्गी की बीमारी
- पति की हरकतों से परेशान होकर पत्नी ने लिया अलग रहने का फैसला
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। कुटुंब न्यायालय के तृतीय अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश मुकेश कुमार दांगी की अदालत ने पति द्वारा गंभीर बीमारी छिपाकर शादी किए जाने के रवैये को अनुचित करार दिया। इसी के साथ पत्नी के हक में विवाह विच्छेद का आदेश पारित कर दिया। आवेदिका गंगानगर, गढ़ा निवासी निकिता दुबे की ओर से अधिवक्ता राजेश राय, आकाश राय व प्रमित पांडे ने पक्ष रखा।
विवाह के दो माह बाद सामने आई सच्चाई
उन्होंने दलील दी कि आवेदिका का विवाह मंडला निवासी जितेंद्र दुबे के साथ संपन्न हुआ था। विवाह के दो माह बाद अचानक पति को मिर्गी का दौरा पड़ा, जिसे देखकर पत्नी घबरा गई और उसने अपने सास-ससुर को बुलाया तो उन्होंने पति को कोई दवाई पिलाई, जिससे वह थोड़ी देर में ठीक हो गया। पत्नी के पूछने पर सास-ससुर ने बताया कि अचानक ही उसकी तबीयत खराब हो जाती है और दवा देने से वह अच्छा हो जाता है।
बीमारी और असामान्य व्यवहार के कारण अलग रहने का निर्णय
बाद में पत्नी ने अपने पति से पूछा कि आपको क्या हो गया था तो पति ने बताया कि उसे मिर्गी का दौरा पड़ा था। ऐसा विवाह के पहले से ही होता रहा है। उक्त बात पता चलने पर पत्नी का अपने पति के साथ रहना मुश्किल हो गया और पति की हालत दिनों-दिन असामान्य होने लगी और वह पागलों के समान हरकतें करने लगा। मायके में पिता के आंख के ऑपरेशन की बात बताकर वह अपने मायके पुत्री सहित आ गई और फिर वापस नहीं गई।
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