डिजीटल डेस्क, भोपाल। भोपाल के कोलार क्षेत्र स्थित गुराड़ी घाट गांव में 50 से अधिक IAS और IPS अधिकारियों द्वारा कृषि भूमि खरीदे जाने और प्रस्तावित वेस्टर्न बायपास के रूट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी और सिस्टम परिवर्तन अभियान के अध्यक्ष आजाद सिंह डबास ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
डबास ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2023 में गुराड़ी घाट क्षेत्र में करीब पांच एकड़ कृषि भूमि की खरीद ऐसे समय की गई, जब यह जमीन अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध थी। बाद में वेस्टर्न बायपास के प्रस्तावित रूट और भूमि उपयोग परिवर्तन के बाद इसी जमीन की कीमत कई गुना बढ़ गई।
उन्होंने आशंका जताई कि बायपास के रूट निर्धारण और जमीन खरीद के बीच संबंधों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
50 अधिकारियों के नाम से खरीदी गई जमीन
पत्र में दावा किया गया है कि मध्यप्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, तेलंगाना, त्रिपुरा और दिल्ली कैडर के कई IAS और IPS अधिकारियों ने मिलकर यह जमीन खरीदी। आरोप है कि 4 अप्रैल 2022 को हुई रजिस्ट्री में जमीन का मूल्य लगभग 5.5 करोड़ रुपये दर्शाया गया, जबकि बाजार मूल्य इससे कहीं अधिक था।
डबास ने कहा कि अगस्त 2023 में शासन द्वारा वेस्टर्न बायपास को मंजूरी मिलने के बाद इस क्षेत्र की जमीनों के दाम तेजी से बढ़े। उनका दावा है कि जिस जमीन का मूल्य पहले कम था, वह अब 55 से 60 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
“वेस्टर्न बायपास की जरूरत पर पुनर्विचार हो”
डबास ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि भोपाल में पहले से मौजूद ईस्टर्न बायपास को विकसित कर यातायात की समस्या का समाधान किया जा सकता है। उनका तर्क है कि 3200 करोड़ रुपये की लागत वाले प्रस्तावित वेस्टर्न बायपास की बजाय कम लागत में मौजूदा बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वेस्टर्न बायपास का नक्शा तीन बार बदला गया और हर बार इसका रूट संबंधित जमीनों के आसपास से गुजरता दिखाई दिया। डबास ने इसे “संदेह पैदा करने वाला तथ्य” बताया।
“पत्नी और बच्चों के नाम पर भी जमीन खरीदी”
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि कुछ अधिकारियों ने भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में अपनी पत्नी और बच्चों के नाम पर भी जमीन खरीदी है।
डबास ने मांग की है कि सभी संबंधित अधिकारियों की वार्षिक संपत्ति विवरणी का सत्यापन कराया जाए और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो।
डबास ने कहा कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई, तो इससे शासन की पारदर्शिता और सुशासन की छवि पर सवाल खड़े होंगे।
