उच्च शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक कैलेंडर जारी करते हुए परीक्षा पूर्व तैयारी अवकाश (प्रिपरेटरी लीव) की व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्णय लिय…और पढ़ें

HighLights
- कॉलेजों में वार्षिक व सेमेस्टर परीक्षा से पहले मिलेगी ‘प्रिपरेटरी लीव’
- 5 से 20 मार्च 2027 के बीच आयोजित की जाएंगी प्रायोगिक परीक्षाएं
- उच्च शिक्षा विभाग ने जारी किया शैक्षणिक कैलेंडर, कड़ाई से होगा पालन
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। प्रदेश के विश्वविद्यालयों और शासकीय-अशासकीय महाविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए राहत भरी खबर है। उच्च शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक कैलेंडर जारी करते हुए परीक्षा पूर्व तैयारी अवकाश (प्रिपरेटरी लीव) की व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्णय लिया है। अब वार्षिक और सेमेस्टर परीक्षाओं से पहले विद्यार्थियों को पर्याप्त समय मिलेगा, जिससे वे बिना नियमित कक्षाओं के दबाव के अपनी परीक्षा की बेहतर तैयारी कर सकेंगे।
विभाग के अनुसार तैयारी अवकाश का उद्देश्य विद्यार्थियों को अंतिम समय में पाठ्यक्रम का पुनरावलोकन करने, कमजोर विषयों पर अतिरिक्त ध्यान देने और परीक्षा के तनाव को कम करने का अवसर देना है। इससे न केवल परीक्षा परिणामों में सुधार की उम्मीद है, बल्कि समयबद्ध और व्यवस्थित शैक्षणिक सत्र भी सुनिश्चित होगा।
5 मार्च से 20 मार्च 2027 तक होंगी प्रायोगिक परीक्षाएं
शैक्षणिक कैलेंडर में प्रायोगिक परीक्षाओं की समय-सीमा भी निर्धारित कर दी गई है। सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को पांच मार्च से 20 मार्च 2027 के बीच अनिवार्य रूप से प्रायोगिक परीक्षाएं आयोजित करनी होंगी। इसके अलावा आंतरिक मूल्यांकन भी तय समय के भीतर पूरा कर विद्यार्थियों के अंक संबंधित विश्वविद्यालयों को भेजना अनिवार्य होगा।
उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा, मूल्यांकन और परिणाम की पूरी प्रक्रिया निर्धारित समय-सीमा के अनुसार संचालित की जाएगी, ताकि किसी भी स्तर पर देरी न हो और विद्यार्थियों का अगला शैक्षणिक सत्र समय पर शुरू किया जा सके। विभाग ने सभी विश्वविद्यालयों और कालेजों को कैलेंडर का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं।
परीक्षा तनाव होगा कम, लाखों विद्यार्थियों को मिलेगा सीधा लाभ
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा से पहले मिलने वाला तैयारी अवकाश विद्यार्थियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहल है। इससे उन्हें व्यवस्थित अध्ययन का समय मिलेगा, परीक्षा का मानसिक दबाव कम होगा और बेहतर प्रदर्शन की संभावना बढ़ेगी। हालांकि विद्यार्थियों की यह मांग भी रही है कि परीक्षाओं से ठीक पहले नियमित कक्षाओं के बजाय तैयारी के लिए अलग समय दिया जाए। अब इस व्यवस्था के लागू होने से लाखों विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
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