नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। लीवर, किडनी और हृदय रोगों की सर्जरी में उपयोग होने वाली मानव प्लाज्मा आधारित एक जीवन रक्षक दवा को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में गंभीर सवाल उठाए गए हैं। एक जनहित याचिका में दावा किया गया है कि इस दवा के एक सैंपल की जांच में ‘एचआईवी रिएक्टिव’ रिपोर्ट सामने आई। याचिकाकर्ता ने दवा की बिक्री और उपयोग पर तत्काल रोक लगाने की मांग करते हुए आशंका जताई है कि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो जनस्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। दोनों पक्षों की विस्तृत सुनवाई के बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
मुख्य बिंदु
याचिकाकर्ता का दावा- दो अलग-अलग जांचों में ‘एचआईवी रिएक्टिव’ रिपोर्ट मिली।
केंद्र, ड्रग कंट्रोलर, एफडीए सहित कई एजेंसियां पक्षकार।
हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें।
क्या है पूरा मामला
नरसिंहपुर निवासी शुभम कौरव द्वारा दायर जनहित याचिका के अनुसार, उन्होंने 8 अप्रैल 2024 को चिकित्सकीय पर्चे के आधार पर जबलपुर के नेपियर टाउन स्थित एक मेडिकल स्टोर से ह्यूमन एल्ब्यूमिन सॉल्यूशन के तीन एम्पुल खरीदे थे। यह दवा गंभीर मरीजों को इंजेक्शन के माध्यम से दी जाती है।
याचिका में कहा गया है कि दवा लगाने से पहले एहतियातन एक एम्पुल की प्रयोगशाला में जांच कराई गई, जिसमें कथित रूप से ‘एचआईवी रिएक्टिव’ रिपोर्ट प्राप्त हुई। इसके बाद पुष्टि के लिए दूसरी उन्नत प्रयोगशाला में परीक्षण कराया गया, जहां भी याचिकाकर्ता के अनुसार समान परिणाम सामने आया।
शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
याचिका में आरोप लगाया गया है कि संबंधित विभागों और अधिकारियों को शिकायत देने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद जनहित में हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दवा की बिक्री एवं उपयोग पर तत्काल रोक लगाने और आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की गई।
कई केंद्रीय और राज्य एजेंसियां बनीं पक्षकार
मामले में भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव, ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया, सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (सीडीएससीओ), मध्य प्रदेश खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त, ड्रग इंस्पेक्टर, जबलपुर तथा संबंधित दवा निर्माता कंपनी सहित अन्य को पक्षकार बनाया गया है।
फैसले पर टिकीं निगाहें
दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद हाई कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। अब निगाहें इस बात पर हैं कि न्यायालय इस जनहित याचिका पर क्या निर्देश जारी करता है।
प्रमुख तथ्य
मामला मानव प्लाज्मा आधारित जीवन रक्षक दवा से जुड़ा है।
‘एचआईवी रिएक्टिव’ मिलने का दावा केवल याचिका में किया गया है।
दवा की बिक्री और उपयोग पर रोक लगाने की मांग की गई है।
हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित।
न्यायालय ने अभी मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
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