अब लार्जर बेंच यह तय करेगी कि नियमितीकरण अथवा नियमित पद पर संविलियन से पहले दैनिक वेतन भोगी के रूप में की गई सेवा अवधि को पेंशन के लिए अर्हक सेवा में …और पढ़ें

HighLights
- चार विरोधाभासी फैसलों के बाद निर्णय लिया
- मामला बड़ी बेंच के विचारार्थ भेजने के निर्देश दिए
- सेवा पेंशन में जुड़ेगी या नहीं, लार्जर बेंच तय करेगी
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की पेंशन और अर्हक सेवा, क्वालिफाइंग सर्विस से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी सवाल को लार्जर बेंच के समक्ष भेज दिया है। एकलपीठ ने इस मुद्दे पर हाई कोर्ट के पूर्व चार निर्णयों में विरोधाभासी अभिमत सामने आने के बाद मामला बड़ी बेंच के विचारार्थ भेजने के निर्देश दिए।
दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण
अब लार्जर बेंच यह तय करेगी कि नियमितीकरण अथवा नियमित पद पर संविलियन से पहले दैनिक वेतन भोगी के रूप में की गई सेवा अवधि को पेंशन के लिए अर्हक सेवा में शामिल किया जा सकता है या नहीं। फैसला प्रदेश के हजारों पूर्व दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
सेवानिवृत्त कल्याण सिंह गौंड़ की याचिका से जुड़ा मामला
मामला नरसिंहपुर लोक निर्माण विभाग से चौकीदार पद से सेवानिवृत्त कल्याण सिंह गौंड़ की याचिका से जुड़ा है। उनकी नियुक्ति एक जुलाई 1985 को दैनिक वेतन भोगी चौकीदार के रूप में हुई थी। बाद में 13 फरवरी 1997 को शासकीय आदेश के तहत उनका नियमित पद पर संविलियन कर दिया गया। वे 31 जनवरी 2018 को सेवानिवृत्त हुए।
वर्ष 2019 में हाई कोर्ट में याचिका दायर की
सेवानिवृत्ति के बाद दैनिक वेतन भोगी के रूप में संविलियन से पहले की उनकी सेवा अवधि को पेंशन के लिए अर्हक सेवा में शामिल नहीं किया गया। इसके खिलाफ उन्होंने वर्ष 2019 में हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
हाई कोर्ट के चार फैसलों में अलग-अलग मत
सुनवाई में सामने आया कि दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की पूर्व सेवा को पेंशन लाभ में शामिल करने के मुद्दे पर हाई कोर्ट के चार फैसलों में अलग-अलग मत हैं। इसे देखते हुए एकलपीठ ने रजिस्ट्री को मामला एक्टिंग चीफ जस्टिस के समक्ष रखने के निर्देश दिए हैं।
