सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्रार ऑफ सोसायटी की मदद से बिना अनुमति बेची गई संपत्तियों की जांच करने के निर्देश भी दिए हैं। ईडी ने यह गिरफ्तारी 14-15 मई 2026 …और पढ़ें

HighLights
- जबलपुर मानेगांव, बिलासपुर, नोएडा की जमीनों का मामला।
- बैंक अकाउंट्स, चल संपत्तियों के खिलाफ फ्रीजिंग आर्डर है।
- उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में एफआईआर दर्ज थीं।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने महर्षि महेश योगी संस्थान के जबलपुर मानेगांव, बिलासपुर, रायपुर, नोएडा की जमीनों को फर्जीवाड़ा कर बेचने वाले मास्टर माइंड जी. रामचन्द्र मोहन और आकाश मालवीय को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपितों को नई दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष अदालत ने ईडी की कस्टडी में भेज दिया है।
दरअसल, महर्षि संस्थान द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी व न्यायमूर्ति अतुल चन्दोरकर की बेंच ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव की निगरानी में एसआईटी गठित की थी। जांच में पाया गया कि भू-माफियाओं ने फर्जीवाड़े से जमीन बेच कर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की है।
सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्रार ऑफ सोसायटी की मदद से बिना अनुमति बेची गई संपत्तियों की जांच करने के निर्देश भी दिए हैं। ईडी ने यह गिरफ्तारी 14-15 मई 2026 को की गई तलाशी की कार्रवाई के बाद की।
ईडी ने धोखाधड़ी में कथित मिलीभगत के लिए मेसर्स सिंहवाहिनी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके डायरेक्टर्स के बैंक अकाउंट्स और चल संपत्तियों के खिलाफ फ्रीजिंग आर्डर भी जारी किया है।
इस मामले में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कई एफआईआर दर्ज थीं। इन एफआईआर में धोखाधड़ी, जालसाजी, नकल और आपराधिक विश्वासघात से जुड़ी लगातार आपराधिक साजिश का आरोप है।
जांच में पता चला कि आरोपियों ने सैकड़ों करोड़ रुपये की प्राइम ट्रस्ट प्रापर्टी को गैर-कानूनी तरीके से बेचने के लिए जाली पावर आफ अटार्नी, फर्जी बोर्ड प्रस्ताव और नकली अधिकृत पत्र का इस्तेमाल किया।
