देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआइ) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट, पुलिस, जेल, फारेंसिक और मेडिको-लीगल सिस्टम का एकीकृत होना न्याय प्रक्रिया को मज …और पढ़ें

HighLights
- नर्मदा का उदाहरण देकर सीजेआई ने समझाया डिजिटल फ्यूजन
- कोर्ट-पुलिस और जेल के एकीकरण से मजबूत होगी न्याय प्रक्रिया
- कोरोना में वर्चुअल सुनवाई की सफलता को CJI ने किया याद
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआइ) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट, पुलिस, जेल, फारेंसिक और मेडिको-लीगल सिस्टम का एकीकृत होना न्याय प्रक्रिया को मजबूत करेगा। जैसे छोटी नदियां मिलकर अमरकंटक से निकलने वाली मां नर्मदा का विशाल स्वरूप बनाती हैं, वैसे ही तकनीकी एकीकरण से न्याय प्रक्रिया में मजबूती आएगी। इसी तरह, अस्पतालों की भांति न्यायपालिका को भी 24 घंटे-सातों दिन की तर्ज पर कार्य करना होगा। ऐसा इसलिए ताकि नागरिक को त्वरित न्याय मिल सके।
डिजिटल तकनीक का उद्देश्य और एकीकृत प्लेटफॉर्म
उन्होंने कहा कि न्याय प्रणाली में बिखरे हुए डिजिटल प्रयासों को एक मंच पर लाना (फ्यूजन) समय की मांग है। वास्तव में डिजिटल तकनीक का उद्देश्य महज कागजों को कम करना नहीं, बल्कि देश के अंतिम छोर पर बैठे आम नागरिक तक त्वरित, पारदर्शी और सुलभ न्याय पहुंचाना है। एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से मामलों के निपटारे में अभूतपूर्व तेजी आएगी।
राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन और कोरोना काल की सफलता
सीजेआइ शनिवार को जबलपुर में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के तत्वावधान में ‘फ्रेगमेंटेशन टू फ्यूजन: एम्पावरिंग जस्टिस वाया यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफार्म इंटीग्रेशन’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव व कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल सहित सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के न्यायाधीश मौजूद रहे।
सीजेआइ सूर्यकांत ने कहा कि वैश्विक महामारी कोरोना के जटिल दौर में जब दुनिया भर की न्यायपालिका का कामकाज ठप था, तब भी भारतीय न्यायपालिका आधुनिक तकनीक का सदुपयोग कर वर्चुअल सुनवाई कर रही थी। अति आवश्यक प्रकरणों की सुनवाई करते हुए सहज, सरल व सुलभ न्याय प्रदान कर रही थी। इसके लिए ग्लोबल जुडिशियरी भारत पर गर्व करती है।
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एमपी का मॉडल देशभर में लागू करने पर जोर
सीजेआइ ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट और मध्य प्रदेश शासन की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बंदियों की समय पर रिहाई, त्वरित सुनवाई और कोर्ट आदेशों के डिजिटलीकरण जैसी सुविधाएं आसान होंगी। मध्य प्रदेश में न्यायिक सुविधाओं का यह विस्तार देशभर में लागू किए जाने योग्य मॉडल है।
मध्य प्रदेश का प्रयास यहीं तक नहीं रुकना चाहिए, इसे पूरे भारत में लागू किया जाए। इस संदर्भ में जल्द कदम उठाएंगे। सीजेआइ बनने के बाद सबसे पहले एआइ कमेटी बनाई थी। त्वरित न्याय प्रक्रिया के लिए उस कमेटी ने अद्भुत काम किया है, जो शीघ्र ही सामने आएगा।
