नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। आने वाले वर्षों में जबलपुर की पहचान महाकौशल के प्रमुख शहर से आगे बढ़कर उत्तर-दक्षिण भारत के बड़े कनेक्टिविटी और लाजिस्टिक्स हब के रूप में हो सकती है। विकसित भारत विजन-2047 के तहत प्रस्तावित सड़क नेटवर्क में वाराणसी से नागपुर तक मजबूत हो रहा कारिडोर जबलपुर को यूपी और महाराष्ट्र के बड़े बाजारों के बीच अहम कड़ी बना रहा है।
जबलपुर के रास्ते दौड़ेगा विकास
रीवा-प्रयागराज-वाराणसी से लेकर जबलपुर और आगे नागपुर तक सड़क संपर्क मजबूत होने के बाद उत्तर भारत का माल दक्षिण और पश्चिम के बाजारों तक तेजी से पहुंच सकेगा। नागपुर से आगे 701 किमी लंबे समृद्धि महामार्ग के जरिए मुंबई महानगरीय क्षेत्र और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट तक नया विकल्प पहले ही उपलब्ध है। यानी एक तरफ वाराणसी-प्रयागराज, दूसरी तरफ नागपुर-मुंबई और बीच में जबलपुर, पूरा नेटवर्क शहर के आर्थिक भूगोल को बदलने की क्षमता रखता है।
बेहतर कनेक्टिविटी से कृषि उत्पाद, उद्योग, पर्यटन, वेयरहाउसिंग, ट्रांसपोर्ट और लाजिस्टिक्स को नए बाजार मिल सकते हैं। हालांकि इस बदलाव की असली रफ्तार सड़क परियोजनाओं के समयबद्ध निर्माण, औद्योगिक निवेश और आधुनिक लॉजिस्टिक सुविधाओं के विकास पर निर्भर करेगी।
वाराणसी-नागपुर कॉरिडोर बदलेगा तस्वीर
वाराणसी-विशाखापट्टनम कारिडोर के पहले चरण में वाराणसी से नागपुर तक सड़क संपर्क को मजबूत करने की दिशा में काम हो रहा है। मध्य प्रदेश में यूपी सीमा से रीवा होते हुए जबलपुर और फिर नागपुर तक कनेक्टिविटी इस नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ी बन सकती है। मौजूदा मार्गों के उन्नयन, बाईपास और चार लेन कनेक्टिविटी से यातायात की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर माल ढुलाई और यात्रियों के सफर पर पड़ेगा। जबलपुर की भौगोलिक स्थिति इसे इस पूरे नेटवर्क में ‘प्राकृतिक ट्रांजिट हब’ का दर्जा दिला सकती है।
महाकुंभ के दौरान मिल चुके हैं संकेत
रीवा के जरिए प्रयागराज और वाराणसी तक पहुंच विंध्य और महाकौशल के लिए नई संभावनाएं खोलेगी। महाकुंभ के दौरान रीवा-प्रयागराज मार्ग पर उमड़ा भारी यातायात इस रूट की बढ़ती जरूरत का संकेत दे चुका है। बेहतर सड़क संपर्क से प्रयागराज, मिर्जापुर और वाराणसी जैसे बड़े धार्मिक एवं आर्थिक केंद्रों तक पहुंच आसान होगी। इससे पर्यटन के साथ व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।
नागपुर से मुंबई तक एक्सप्रेसवे की ताकत
जबलपुर से नागपुर पहुंचने के बाद आगे मुंबई तक जाने का रास्ता पहले से काफी मजबूत है। 701 किलोमीटर लंबा छह लेन समृद्धि महामार्ग नागपुर को मुंबई महानगरीय क्षेत्र से जोड़ता है। यह नेटवर्क जवाहरलाल नेहरू पोर्ट तक माल पहुंचाने में सहायक होता है। यानी भविष्य में जबलपुर से उत्तर भारत का माल नागपुर होते हुए मुंबई और बंदरगाह तक पहुंच सकता है। इसी तरह महाराष्ट्र का माल रीवा-जबलपुर होते हुए उत्तर प्रदेश के बाजारों तक जा सकेगा।
हाईवे के साथ आएगा कारोबार
सबसे बड़ा असर जबलपुर और आसपास के आर्थिक क्षेत्र पर पड़ सकता है। बेहतर कनेक्टिविटी से वेयरहाउस, लाजिस्टिक्स पार्क, ट्रांसपोर्ट, कृषि-प्रसंस्करण और औद्योगिक इकाइयों के लिए जमीन तैयार हो सकती है। महाकौशल के अनाज, दलहन, तिलहन, फल-सब्जियां और अन्य कृषि उत्पाद बड़े बाजारों तक तेजी से पहुंच सकेंगे। स्थानीय उद्योगों को यूपी और महाराष्ट्र के बड़े उपभोक्ता बाजार मिलेंगे।
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कनेक्टिविटी की प्रस्तावित तस्वीर
- उत्तर: वाराणसी-मिर्जापुर-रीवा-जबलपुर
- मध्य: जबलपुर से महाकौशल के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने वाला नेटवर्क
- दक्षिण: जबलपुर-नागपुर
- आगे पश्चिम: नागपुर-समृद्धि महामार्ग-मुंबई महानगरीय क्षेत्र
- अतिरिक्त विकल्प: नागपुर से पुणे की दिशा में विकसित हो रहे एक्सप्रेसवे संपर्क
- संभावित आर्थिक लाभ: कृषि, उद्योग, लाजिस्टिक्स, पर्यटन और बड़े बाजारों तक तेज पहुंच
ग्रीनफील्ड सड़क कारिडोर्स से जबलपुर देश का प्रमुख कनेक्टिविटी और लाजिस्टिक हब के रूप में उभरेगा। इस रोड नेटवर्क पर सहमति बन चुकी है जिससे विजन 2047 के मास्टर प्लान को पूर्णता मिलेगी।- राकेश सिंह, मंत्री, लोनिवि, मप्र शासन
