नईदुनिया प्रतिनिधि, मुरैना। प्रदेश सरकार अवैध कालोनियों को लेकर सख्त है, लेकिन मुरैना में जिला प्रशासन और नगर निगम न तो अवैध कालोनियों पर रोक लगा पा रहा है, न ही वैध की गई कालोनियों में मूलभूत सुविधाएं विकसित हो पा रही हैं। लगभग चार साल पहले 27 कालोनियों को वैध घोषित किया था। इनमें से कई कालोनियों में बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं का संकट है।
दिसंबर 2022 तक 103 अवैध कालोनियां थीं
मुरैना शहरी क्षेत्र में दिसंबर 2022 तक 103 अवैध कालोनियां थीं, जिन्हें नगर निगम ने वैध करने के लिए चिन्हित किया। इन 103 अवैध कालोनियों में से 27 कालोनियों को साल 2022 में वैध कर दिया गया। जैसे ही नगर निगम ने इन 27 कालोनियों को वैध घोषित किया, उसके बाद इन कालोनियों में प्लाट के दाम 60 से 100 प्रतिशत तक बढ़ गए। जो प्लाट पहले 15 लाख का था, वह 25 से 30 लाख का हो गया।
वैध हुई सुभाष नगर, परशुराम नगर जैसी कई कालोनियों में मकान बनाकर रह रहे परिवारों को सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझना पड़ रहा है। कालोनाइजर ने यहां कोई सुविधा नहीं की और अब नगर निगम की माली हालत इतनी खस्ता है कि अवैध कालोनियों में पानी की निकासी के लिए नालियां तक नहीं बनवा पा रहा।
मकान बनाने के लिए नगर निगम का परमिशन
इन कालोनियों में मकान बनाने के लिए नगर निगम परमिशन देने लगा है और इसके एवज में शुल्क वसूलना शुरू हो गया, फिर भी सुविधाओं का विस्तार नहीं हो रहा। शहर के आसपास बसी कालोनियों की हालत तो ऐसी है कि यहां बिजली कनेक्शन के लिए भी बिजली लाइन नहीं, इसलिए रहवासी एक-एक किलोमीटर दूर तक तार डालकर बिजली कनेक्शन ले रहे हैं।
प्रतिबंध के बाद 120 से ज्यादा अवैध कालोनियां बढ़ीं
दिसंबर 2022 के बाद से अवैध कालोनियां बसाने पर सख्त कार्रवाई का प्रविधान हो गया है। दूसरी तरफ जिला मुख्यालय से लेकर सबलगढ़, कैलारस, जौरा, अंबाह व पोरसा में बीते चार साल में 120 से ज्यादा अवैध कालोनियां बन गई हैं। सबसे ज्यादा मुरैना शहर में अवैध कालोनियां बढ़ी हैं, जिनकी संख्या करीब 70 से अधिक है। अवैध कालोनियों के मामले में सबलगढ़ नगर पालिका क्षेत्र दूसरे नंबर पर है।
साल 2023 में कलेक्टर की नाराजगी के बाद 11 कालोनाइजरों पर एफआइआर हुई थी। यह कार्रवाई तब हुई थी जब इन कालोनाइजरों ने अवैध कालोनियों में सरकारी जमीन तक को शामिल कर उस पर प्लाट काट दिए थे। अगर यह जांच और बढ़ती तो कार्रवाई की जद में कई कालोनाइजर आते, लेकिन प्रशासन की कार्रवाई भी बंद हो गई।
चार साल से निगम प्रशासन ने ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की, इसीलिए अवैध कालोनियां इस तरह बढ़ रही हैं कि नेशनल हाईवे पर धौलपुर रोड, जौरा रोड से लेकर शहर के बीच नंदेपुरा रोड, शिकारपुर बायपास, अंबाह बायपास रोड पर जगह-जगह खेतों में प्लाट काटकर कालोनियां बन रही हैं।
बिजली कंपनी की सख्ती भी ठंडे बस्ते में
हर अवैध कालोनी में बिजली खंभों का जाल बिछाया जा रहा है, लेकिन इसके लिए बिजली कंपनी से कोई अनुमति नहीं ली जा रही। न ही बिजली कंपनी के मानकों अनुसार काम हो रहा है। करीब तीन साल पहले बिजली कंपनी के तत्कालीन महाप्रबंधक पीके शर्मा ने ऐसी अवैध कालोनियों पर कार्रवाई करते हुए आधा दर्जन कालोनाइजरों पर केस दर्ज करवाए थे। ऐसी अवैध कालोनियों को बिजली सप्लाई देने पर भी रोक लगा दी थी।
लेकिन अफसर बदल जाने के बाद बिजली कंपनी अवैध कालोनियों में भी बिजली सप्लाई दे रही है और ट्रांसफार्मर लगा रही है।
अधिकारियों का क्या कहना
कालोनियां वैध हो चुकी हैं, उनमें से अधिकांश में वार्ड पार्षद द्वारा बताए जा रहे काम किए जा रहे हैं। लोगों की मांग पर भी काम करवाए जा रहे हैं। अवैध कालोनियों के संबंध में राजस्व निरीक्षक व मैदानी कर्मचारियों से जानकारी ली जा रही है, उसके बाद प्रभावी कार्रवाई करेंगे।
सत्येंद्र धाकरे, आयुक्त नगर निगम, मुरैना।
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