हाई कोर्ट ने नकली डेयरी उत्पादों और कथित मनी लान्ड्रिंग मामले में आरोपित किशन मोदी की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने इसे वित्तीय व्यवस्था पर गंभीर …और पढ़ें

HighLights
- हाई कोर्ट ने किशन मोदी की जमानत खारिज की।
- मनी लान्ड्रिंग को गंभीर आर्थिक अपराध बताया गया।
- नकली डेयरी उत्पादों से करोड़ों कमाई का आरोप।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। नकली दूध, पनीर, घी और अन्य डेयरी उत्पादों के जरिए करोड़ों रुपये के कथित अवैध कारोबार से जुड़े मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
कोर्ट ने कहा कि मनी लान्ड्रिंग कोई सामान्य अपराध नहीं, बल्कि देश की वित्तीय व्यवस्था और संप्रभुता पर सीधा प्रहार है। इसी टिप्पणी के साथ अदालत ने आरोपित किशन मोदी की जमानत याचिका खारिज कर दी।
हाई कोर्ट ने जमानत देने से किया इन्कार
न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की समर वेकेशन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य प्रथमदृष्टया आरोपित की गंभीर भूमिका की ओर संकेत करते हैं। ऐसे में उसे जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। किशन मोदी भोपाल स्थित मेसर्स जयश्री गायत्री फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर हैं, जो ‘मिल्क मैजिक’ ब्रांड के नाम से डेयरी उत्पादों का निर्माण करती है।
ईडी जांच में सामने आए गंभीर आरोप
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुसार कंपनी में दूध से प्राकृतिक फैट निकालकर उसकी जगह पाम ऑयल और अन्य पदार्थ मिलाए जाते थे। कथित रूप से मिलावटी उत्पादों की बिक्री देश और विदेश तक की गई, जिससे करीब 20 करोड़ रुपये की अवैध कमाई हुई। जांच में 15 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध मनी लान्ड्रिंग लेन-देन का भी खुलासा हुआ है।
फर्जी दस्तावेज और हेरफेर के मिले साक्ष्य
ईडी ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान बड़े पैमाने पर पाम ऑयल की खरीद, फर्जी इनवाइस और लैब रिपोर्टों में हेरफेर के प्रमाण मिले हैं। कोर्ट ने माना कि जिस स्तर पर यह कारोबार संचालित हो रहा था, उसमें कंपनी के डायरेक्टर का अनभिज्ञ होना प्रथमदृष्टया स्वीकार्य नहीं माना जा सकता।
आर्थिक अपराधों पर सख्त टिप्पणी
अदालत ने कहा कि आर्थिक अपराध और मनी लान्ड्रिंग जैसे मामलों का प्रभाव व्यापक होता है तथा यह देश की आर्थिक व्यवस्था को प्रभावित करते हैं। इसी आधार पर किशन मोदी की जमानत याचिका निरस्त कर दी गई।
