सरकार की ओर से इंजीनियरिंग के बाद अब मेडिकल जैसी महत्वपूर्ण पढ़ाई भी हिंदी माध्यम में शुरू करने की पहल की गई है, लेकिन दूसरी ओर देवी अहिल्या विश्वविद् …और पढ़ें

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। नई शिक्षा नीति (एनईपी) के अंतर्गत भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने और उच्च शिक्षा को मातृभाषा यानी हिन्दी भाषा में करवाए जा रहे हैं। सरकार की ओर से इंजीनियरिंग के बाद अब मेडिकल जैसी महत्वपूर्ण पढ़ाई भी हिंदी माध्यम में शुरू करने की पहल की गई है, लेकिन दूसरी ओर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय हिन्दी को महत्व नहीं दे रहा है।
सोमवार को मास्टर ऑफ जर्नलिज्म (एमजे) पाठ्यक्रम के मीडिया रिसर्च का प्रश्न पत्र केवल अंग्रेजी भाषा में विद्यार्थियों को बांट दिया। हिन्दी में प्रश्न नहीं पूछे जाने से छात्र-छात्राएं परेशान हो गए हैं। इन्होंने परीक्षा केंद्रों पर हिन्दी में प्रश्न नहीं आने पर आपत्ति दर्ज करवाई है। इसके बाद केंद्रों पर प्रश्नों का अनुवाद कर विद्यार्थियों को बताया गया। हालांकि, विश्वविद्यालय ने पूरा मामला परीक्षा समिति के समक्ष रखने का फैसला किया है।
परीक्षा केंद्रों पर मचा हड़कंप, अधिकारियों ने कराया हिंदी अनुवाद
विश्वविद्यालय ने एमजे एक वर्षीय पाठ्यक्रम की परीक्षा पहले 2 जून से रखी थी, लेकिन बाद में टाइम टेबल में बदलाव किया गया। 9 जून से एमजे की परीक्षा शुरू हुई। सोमवार को मीडिया रिसर्च का चौथा पेपर दोपहर 2 से शाम 5 बजे वाले सत्र में हुआ। अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय कला व वाणिज्य महाविद्यालय को केंद्र बनाया गया, जहां परीक्षा देने आए विद्यार्थियों को प्रश्न पत्र दिए गए। उसमें सिर्फ अंग्रेजी भाषा में प्रश्न पूछे गए। 100 अंक के इस पत्र में पांच प्रश्नों के जवाब विद्यार्थियों को देना था। प्रत्येक प्रश्न का विकल्प रखा गया, लेकिन हिन्दी माध्यम में प्रश्न नहीं पूछे गए।
इसे लेकर विद्यार्थियों ने केंद्राध्यक्ष को आपत्ति दर्ज कराई। तत्काल बाकी केंद्रों से भी विश्वविद्यालय कंट्रोल रूम में पेपर अंग्रेजी में आने के बारे में बताया गया। अधिकारियों ने प्रश्नों का हिन्दी अनुवाद करके विद्यार्थियों को बताने के निर्देश दिए। यहां तक कि विद्यार्थियों को अपने माध्यम से प्रश्नों के जवाब लिखने को कहा गया। विद्यार्थियों का कहना था कि जब पाठ्यक्रम हिंदी माध्यम से पढ़ाया जा रहा है और बड़ी संख्या में विद्यार्थी हिंदी में अध्ययन कर रहे हैं, तो परीक्षा का प्रश्न पत्र भी हिंदी में उपलब्ध न होना बड़ी चूक को दर्शाता है।
जिम्मेदार अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास, जांच की बात कही
सहायक कुलसचिव डॉ. विष्णु मिश्रा का कहना है कि केंद्रों से मौखिक शिकायत मिली है। इस संबंध में विद्यार्थियों से आवेदन नहीं मिला है। हालांकि, पूरे मामले को परीक्षा समिति के सामने रखा जाएगा।
इस घटना में प्रश्न पत्र की छपाई को लेकर बड़ी लापरवाही मानी जा रही है, क्योंकि हिन्दी में प्रश्न नहीं पूछे गए। प्रिंटिंग के दौरान भी जिम्मेदारों ने प्रश्न पत्र पर ध्यान नहीं दिया है। पूरे मामले में अब विश्वविद्यालय की प्रिंटिंग प्रेस पर सवाल खड़े हो रहे हैं और पेपर सेटर की पूरी गलती बताई जा रही है। मामले में प्रेस कंट्रोलर डॉ. अजय तिवारी का कहना है कि हिन्दी में प्रश्न पत्र नहीं आने की शिकायत सामने नहीं आई है। वैसे, पूरे प्रकरण में जांच करने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी सामने आ चुकी है विश्वविद्यालय की गड़बड़ी
यह पहली बार नहीं है जब विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। इससे पहले भी इसी विषय के प्रश्न पत्र को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई थी। उस समय 100 अंकों के प्रश्न पत्र की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन शिक्षकों ने 50 अंकों के आधार पर किया था। उस दौरान भी विद्यार्थी काफी परेशान हुए थे। मामले के तूल पकड़ने के बाद विश्वविद्यालय ने दोबारा विद्यार्थियों का मूल्यांकन किया था।
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