नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने लोक निर्माण विभाग में अधिकारियों को प्रभार बांटने की शासन की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी करते हुए एक अहम प्रशासनिक आदेश निरस्त कर दिया है।
कोर्ट ने सवाल उठाया कि जिस अधिकारी संजय कुमार मस्के के खिलाफ गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और निर्माण संबंधी मामलों की जांच लंबित हो, उसे उसी कार्यालय की कमान कैसे सौंपी जा सकती है, जहां उसकी जांच और अभियोजन प्रक्रिया संचालित होनी है?
कोर्ट ने इसे प्रशासनिक शक्तियों के अनुचित उपयोग का उदाहरण माना। हाई कोर्ट ने भोपाल ब्रिज जोन के मुख्य अभियंता पद के अतिरिक्त प्रभार से जुड़े आदेश को निरस्त करते हुए स्पष्ट किया कि शासन की ऐसी व्यवस्था निष्पक्ष प्रशासन और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के प्रतिकूल है।
कोर्ट ने कहा कि किसी दागी अधिकारी को ऐसा पद सौंपना, जहां वह प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अपनी ही जांच की निगरानी कर सके, स्वीकार्य नहीं हो सकता।
तीन घंटे में बदला आदेश, कोर्ट ने उठाए सवाल
मामला प्रभारी मुख्य अभियंता पीसी वर्मा से जुड़ा है। जुलाई, 2025 से उनके पास भोपाल ब्रिज जोन का अतिरिक्त प्रभार था। 29 अप्रैल, 2026 को विभाग ने निविदा मूल्यांकन में कथित अनियमितताओं को लेकर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया।
आश्चर्यजनक रूप से नोटिस जारी होने के महज तीन घंटे बाद ही उनसे यह प्रभार वापस लेकर दूसरे अधिकारी संजय कुमार मस्के को सौंप दिया गया। इसी आदेश को चुनौती देते हुए वर्मा हाई कोर्ट पहुंचे थे।
गंभीर आरोपों के बावजूद मिला अहम दायित्व सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष यह तथ्य आया कि जिस अधिकारी संजय कुमार मस्के को प्रभार दिया गया, उसके विरुद्ध सिवनी की वैनगंगा नदी पर बने सबमर्सिबल पुल के ढहने तथा ग्वालियर के हजार बिस्तर अस्पताल परियोजना में लगभग 2.41 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों की जांच लंबित है। इस पर हाई कोर्ट ने कड़ी आपत्ति दर्ज की।
वरिष्ठता और नियमों की भी अनदेखी हाई कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी भर्ती एवं सेवा नियम, 1983 का उल्लेख करते हुए कहा कि पदोन्नति की पात्रता श्रेणी (जोन आफ कंसिडरेशन) से बाहर के अधिकारियों को उच्च पदों का प्रभार देना नियमों की भावना के विपरीत है। इससे न केवल वरिष्ठता क्रम प्रभावित होता है, बल्कि पूरी प्रशासनिक संरचना पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
मुख्य सचिव को भी संदेश
हाई कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव को निर्देश दिया है कि भोपाल ब्रिज जोन का प्रभार किसी निष्कलंक सेवा अभिलेख वाले पात्र अधिकारी को सौंपा जाए। साथ ही मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि भविष्य में ऐसी प्रशासनिक चूक दोबारा न हो। फैसले को विभागीय जवाबदेही और सुशासन के मानकों पर एक महत्वपूर्ण न्यायिक हस्तक्षेप माना जा रहा है।
