नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जिला न्यायाधीश राहुल सिंह के न्यायालय ने केवी डेवलपर्स विरुद्ध शाहबानो खानम सहित अन्य मामले में नवाब जहांगीराबाद की करीब 1000 करोड़ रुपये मूल्य की साढ़े छह एकड़ भूमि को खुर्द-बुर्द करने पर अंतरिम रोक लगा दी है।
यह भूमि तीन पत्ती से यातायात थाने तक के क्षेत्र में स्थित बताई गई है। अदालत ने नवाब परिवार की वारिसान शाहबानो खानम, उनकी पुत्री शाहनवाज नीलोफर सहित अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है।
जिला न्यायालय ने प्रतिवादियों को विवादित संपत्ति बेचने, हस्तांतरित करने या उस पर किसी प्रकार का भार सृजित करने से रोक दिया है। यह आदेश छह माह अथवा प्रकरण के निराकरण, जो भी पहले हो, तक प्रभावी रहेगा।
परिवादी गंगानगर, गढ़ा निवासी कॉलोनाइजर व बिल्डर विनय दुबे की अधिवक्ता आशीष मिश्रा, राहुल यादव व शिवाजी सिंह ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि केबी डेवलपर्स के साथ शाहबानो खानम और उनकी पुत्री शाहनवाज नीलोफर ने उक्त भूमि के संबंध में अनुबंध किया था। इसके एवज में एक करोड़ 20 लाख रुपये एडवांस के रूप में लिए गए थे।
आरोप है कि बाद में अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करते हुए संबंधित भूमि का सौदा किसी अन्य पक्ष से करने का प्रयास किया गया। इससे मूल अनुबंधकर्ता केबी डेवलपर्स के प्रमुख विनय दुबे के साथ धोखाधड़ी की स्थिति उत्पन्न हुई।
इस संबंध में विधिक सूचना पत्र भी भेजा गया, लेकिन विवाद का समाधान नहीं होने पर परिवादी ने व्यवहार न्यायालय की शरण ली। सुनवाई के बाद अदालत ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए संबंधित भूमि के संबंध में किसी भी प्रकार की खुर्द-बुर्द अथवा अधिकार प्रभावित करने वाली कार्रवाई पर रोक लगा दी।
जिला न्यायालय ने अभिलेखों के अवलोकन के बाद प्रथम दृष्ट्या माना कि पक्षकारों के बीच लिखित विकास अनुबंध हुआ है, जिस पर प्रतिवादियों के हस्ताक्षर हैं। भुगतान किए जाने के दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए हैं।
न्यायालय ने माना कि वाद लंबित रहने के दौरान संपत्ति किसी तीसरे पक्ष को हस्तांतरित करने अथवा उसकी प्रकृति बदलने से विवाद जटिल हो सकता है और वादी को ऐसी क्षति हो सकती है, जिसकी भरपाई केवल धनराशि से संभव नहीं होगी। इसी आधार पर अदालत ने विवादित संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए अंतरिम रोक का आदेश जारी किया।
क्या है पूरा मामला
जबलपुर निवासी शाहबानो खानम सहित अन्य के साथ पांच दिसंबर, 2022 को संपत्ति के विकास व निर्माण संबंधी लिखित अनुबंध हुआ था। इसके तहत वादी ने प्रतिवादियों को करीब 1.20 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। निर्माण एवं विकास कार्य से जुड़े अन्य खर्च वहन करने की जिम्मेदारी भी वादी की थी। वादी की ओर से बताया गया कि अनुबंध के पालन के लिए प्रतिवादियों को विधिक नोटिस दिए गए, लेकिन आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई।
