इंदौर एयरपोर्ट पर राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) द्वारा सोने की जब्ती के मामले में प्राथमिक जांच से बड़ा खुलासा हुआ है। इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड इंदौर…और पढ़ें

HighLights
- अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू होते ही फिर सक्रिय हुआ सोना तस्करी गिरोह
- इंदौर एयरपोर्ट पर पकड़ाया ₹1.44 करोड़ का सोना
- सराफा कारोबारी लंबे समय से सक्रिय था और जिसने एयरपोर्ट में मजबूत नेटवर्क तैयार कर रखा था
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : इंदौर एयरपोर्ट पर राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) द्वारा सोने की जब्ती के मामले में प्राथमिक जांच से बड़ा खुलासा हुआ है। इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड इंदौर का ही एक सर्राफा कारोबारी है, जो लंबे समय से सक्रिय था और जिसने एयरपोर्ट के भीतर अपना एक मजबूत नेटवर्क तैयार कर रखा था।
शारजाह रूट बंद होने के कारण इंदौर एयरपोर्ट पर करीब पांच महीने तक अंतरराष्ट्रीय उड़ानें निलंबित रहीं, जिसके चलते यह गिरोह उड़ानें दोबारा शुरू होने का इंतजार कर रहा था। जैसे ही 15 जुलाई से सप्ताह में चार दिन चलने वाली इंदौर-अबू धाबी फ्लाइट शुरू हुई, गिरोह ने तुरंत अपनी तस्करी की गतिविधियां फिर शुरू कर दीं।
अंदरूनी सांठगांठ की सूचना पर DRI की कार्रवाई
तस्करी में एयरपोर्ट के अंदरूनी स्टाफ के शामिल होने की खुफिया जानकारी मिलने पर DRI की टीम ने 3 अगस्त को एयरपोर्ट परिसर के बाहर निगरानी बढ़ा दी।
एयर इंडिया एक्सप्रेस के एक वर्दीधारी कर्मचारी द्वारा बाहर खड़ी गाड़ी में बैठे लोगों को पैकेट सौंपने के तुरंत बाद DRI अधिकारियों ने उस वाहन को घेर लिया। गाड़ी के ग्लव बॉक्स की तलाशी लेने पर चांदी की पॉलिश किए हुए दो धातु के कड़े बरामद हुए। जांच करने पर पुष्टि हुई कि वे 24-कैरेट के शुद्ध सोने के कड़े थे, जिनकी बाजार में कीमत लगभग ₹1.44 करोड़ है।
इस तरह अंजाम दिया जाता था खेल
तस्करी का तरीका काफी सीधा लेकिन शातिराना था:
- अबू धाबी से आने वाले यात्री (करियर) कस्टम्स डेस्क तक पहुंचने से पहले ही एरोब्रिज (Aerobridge) पर सोना एयरलाइन कर्मचारी को दे देते थे।
- इसके बाद वह एयरलाइन कर्मचारी सर्विस सीढ़ियों के जरिए सीधे रनवे (टारमैक) पर उतर जाता था, जिससे इमिग्रेशन और कस्टम्स दोनों की चेकिंग बायपास हो जाती थी।
- कर्मचारी बाहर निकलकर एयरपोर्ट परिसर के बाहर इंतजार कर रहे साथियों को सोना सौंप देता था।
कस्टम स्टाफ और एयरलाइन कर्मचारी समेत 5 गिरफ्तार
DRI सूत्रों के मुताबिक, मुख्य साजिशकर्ता कस्टम ड्यूटी और टैक्स से बचने के लिए यूएई (UAE) से विदेशी सोने की खेप मंगवाता था और बाद में उसे प्रोसेस करके स्थानीय बाजारों में छोटे ज्वैलर्स व खरीदारों को बेच देता था।
