याचिका में दावा है कि आंसर-की के आधार पर उसके करीब 441 अंक बन रहे थे, लेकिन आधिकारिक परिणाम में केवल 145 अंक दर्ज किए गए।

HighLights
- नीट परीक्षा की मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल
- हाई कोर्ट से रिकॉर्ड मंगाकर जांच की मांग
- अभ्यर्थी अंशिका सिंह ने दायर की याचिका
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। नीट परीक्षा के परिणाम में 296 अंकों के कथित अंतर ने अभ्यर्थी अंशिका सिंह को हाई कोर्ट की शरण लेने के लिए मजबूर कर दिया। याचिका में दावा है कि आंसर-की के आधार पर उसके करीब 441 अंक बन रहे थे, लेकिन आधिकारिक परिणाम में केवल 145 अंक दर्ज किए गए।
छात्रा ने मूल्यांकन प्रक्रिया की जांच और परिणाम में कथित विसंगति दूर करने की मांग की है। मामले की सुनवाई प्रशासनिक न्यायमूर्ति आनंद पाठक व न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ के समक्ष प्रस्तावित है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दुर्गेश सिंगरोरे पैरवी कर रहे हैं।
नीट परिणाम और मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए
अंशिका सिंह ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर नीट परिणाम और मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार, आंसर-की के आधार पर उसके अनुमानित अंक और घोषित परिणाम में बड़ा अंतर है। उसने संबंधित परीक्षा प्राधिकरण से मूल्यांकन संबंधी रिकॉर्ड मंगाकर जांच कराने का आग्रह किया है।
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हाई कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग
याचिका में कहा गया है कि यदि जांच में मूल्यांकन या परिणाम तैयार करने में किसी प्रकार की त्रुटि सामने आती है तो उसे दुरुस्त किया जाए और अभ्यर्थी को उसके वास्तविक अंकों के आधार पर परिणाम का लाभ दिया जाए।
