मामले के प्रमुख गवाह तत्कालीन एसआई जेपी वर्मा के बयान में भी कई महत्वपूर्ण विसंगतियां सामने आईं। उन्होंने कहा कि पुलिस वाहन चेकिंग के लिए मौके पर पहुं …और पढ़ें

HighLights
- कोर्ट ने कहा संदेह का लाभ आरोपित का वैधानिक अधिकार।
- टिप्पणी- किसी निर्दोष को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
- नारकोटिक्स मामले में राज्य शासन की अपील निरस्त।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति आरके वाणी की एकलपीठ ने अपने एक आदेश में साफ किया है कि किसी निर्दोष व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। आपराधिक कानून में आरोप सिद्ध करने की जिम्मेदारी अभियोजन पर होती है और दोषमुक्ति के आदेश में अपीलीय अदालत तभी हस्तक्षेप कर सकती है, जब उपलब्ध साक्ष्यों से आरोपित का अपराध संदेह से परे सिद्ध होना ही एकमात्र निष्कर्ष हो। इसी टिप्पणी के साथ एकलपीठ ने नारकोटिक्स एक्ट के मामले में राज्य सरकार की अपील निरस्त कर दी।
राज्य शासन की ओर से दायर अपील में दमोह जिले के पथरिया थाना क्षेत्र के एक प्रकरण का हवाला दिया गया था। पुलिस के अनुसार वाहन चेकिंग के दौरान रमेश सिंह, गणेश सिंह लोधी व काका उर्फ सुशील को मोटरसाइकिल की डिक्की में गांजा ले जाते हुए पकड़ा गया था। तीनों के विरुद्ध नारकोटिक्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया, लेकिन साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ट्रायल कोर्ट ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया।
इसी आदेश को चुनौती देते हुए शासन ने हाई कोर्ट की शरण ली थी। सुनवाई के दौरान एकलपीठ ने पाया कि अभियोजन का एक स्वतंत्र गवाह अपने पूर्व कथन से मुकर गया, जबकि दूसरे स्वतंत्र गवाह से पूछताछ ही नहीं कराई गई। रिकार्ड पर मुख्यतः विभागीय गवाहों के बयान ही उपलब्ध थे।
मामले के प्रमुख गवाह तत्कालीन एसआई जेपी वर्मा के बयान में भी कई महत्वपूर्ण विसंगतियां सामने आईं। उन्होंने कहा कि पुलिस वाहन चेकिंग के लिए मौके पर पहुंची थी और गांजा मिलने की पूर्व सूचना नहीं थी, जबकि एक अन्य पुलिसकर्मी ने बयान दिया कि उन्हें पहले से सूचना प्राप्त हुई थी।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि गवाह मोटरसाइकिल की कंपनी, रंग, पंजीयन क्रमांक अथवा डिक्की के रंग जैसी मूलभूत जानकारियां तक नहीं बता सके। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उनकी उपस्थिति में केवल गांजे की जांच हुई थी, नमूना लेने की प्रक्रिया नहीं। इन परिस्थितियों में ट्रायल कोर्ट के दोषमुक्ति आदेश में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं पाते हुए हाई कोर्ट ने शासन की अपील निरस्त कर दी।
