डिजिटल डेस्क, भोपाल। आज पूरी दुनिया में ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ का जश्न मनाया जा रहा है और आधुनिक जीवनशैली में इसे भविष्य का बेहतरीन करियर भी बताया जा रहा है। लेकिन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और आसपास के बड़े सरकारी विश्वविद्यालयों से जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं।
एक तरफ जहां योग का प्रचार-प्रसार चरम पर है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी क्षेत्र में रोजगार के अवसर न बढ़ने के कारण छात्र अब योग कोर्सेज से दूरी बना रहे हैं। प्रदेश के चार प्रमुख विश्वविद्यालयों में योग की करीब आधी सीटें खाली पड़ी हैं।
4 विवि में योग कोर्सेज की 330 सीटें, सिर्फ 175 पर दाखिले
भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय और सांची बौद्ध विश्वविद्यालय में योग के यूजी, पीजी और डिप्लोमा कोर्स संचालित हो रहे हैं। इन चारों प्रमुख संस्थानों को मिलाकर योग कोर्सेज की कुल 330 सीटें निर्धारित हैं, लेकिन सत्र 2025-26 में मात्र 175 सीटों पर ही दाखिले हो सके। यानी लगभग 47% सीटें पूरी तरह खाली रह गईं।
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बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में प्रवेश की स्थिति
बीयू में योग से जुड़े विभिन्न कोर्सेज में पिछले तीन सत्रों के दौरान प्रवेश का ग्राफ लगातार गिरा है।
एमए इन योगिक साइंस (सीटें: 30): वर्ष 2023-24 में 29 प्रवेश, 2024-25 में 34 (सीटें बढ़ाई गई थीं) और 2025-26 में घटकर 27 रह गए।
पीजी डिप्लोमा इन योगिक साइंस (सीटें: 60): वर्ष 2023-24 में 47 प्रवेश, 2024-25 में 42 और 2025-26 में 49 दाखिले हुए।
एमएससी इन योगिक साइंस (सीटें: 30): वर्ष 2023-24 में 27 प्रवेश, 2024-25 में 18 और 2025-26 में मात्र 16 छात्रों ने एडमिशन लिया।
सर्टिफिकेट इन योगिक साइंस योग थेरेपी (सीटें: 30): वर्ष 2023-24 में 15, 2024-25 में 18 और 2025-26 में 21 प्रवेश हुए।
एमसीयू, सांची विवि और हिंदी विवि का हाल और भी खराब
माखनलाल यूनिवर्सिटी : यहाँ एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा में कुल 30 सीटें हैं, लेकिन हर साल औसतन केवल 15 से 20 छात्र ही प्रवेश ले रहे हैं।
सांची बौद्ध विवि: योगिक साइंस में एमए-एमएससी को मिलाकर यहाँ कुल 20 सीटें हैं। सत्र 2023-25 और 2024-26 में यहाँ मात्र 13-13 दाखिले ही हो पाए।
हिंदी विश्वविद्यालय: दाखिले के मामले में सबसे खराब स्थिति अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विवि की है। यहाँ योग कोर्सेज की कुल 100 सीटें हैं, लेकिन सत्र 2025-26 में महज 23 विद्यार्थियों ने ही एडमिशन लिया, जो कुल क्षमता का सिर्फ 23% है।
एक्सपर्ट व्यू: सरकार नियमित पद सृजित करे, तभी बढ़ेगा स्कोप
विशेषज्ञों के अनुसार एकेडमिक कोर्सेज में प्रवेश की कमी का सबसे बड़ा कारण यह है कि अभी सरकारी विभागों में योग का अधिक स्कोप नहीं दिख रहा है। स्कूलों में ‘योग शिक्षक’ और ‘योग ट्रेनर’ के नियमित पद होने चाहिए। केंद्रीय विद्यालयों में शिक्षक रखे तो जाते हैं, लेकिन वे संविदा आधार पर होते हैं। इसके अलावा कॉलेजों में भी योग का अलग विभाग स्थापित होना चाहिए।
स्थिति यह है कि जो स्टूडेंट्स योग में पीएचडी तक कर लेते हैं, वे भी नियमित जॉब के लिए परेशान हो रहे हैं। शासन को तुरंत नियमित पद सृजित करने की जरूरत है। हालांकि, जो स्टूडेंट्स यह कोर्स गंभीरता से करते हैं, वे निजी अस्पतालों में योग थेरेपिस्ट के तौर पर या खुद का सेंटर खोलकर हर महीने 50 हजार रुपये तक आसानी से कमा लेते हैं।
