फर्जी दस्तावेज तैयार कर सिम कार्ड खरीदने-बेचने का गिरोह सामने आने के बाद अब राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय ऑपरेशन फेस-2 अभियान चलाने जा रहा है। इसमें उन आ …और पढ़ें

HighLights
- ऑपरेशन फेस-2 के तहत थोक में सिम खरीदने और फर्जी सिम नेटवर्क की पहचान की जाएगी
- अब तक 135 चेहरों के आधार पर 36,668 फर्जी सिम कार्ड जारी हुए, 33 एफआईआर दर्ज
- साइबर अपराधों से बचाव के लिए 24 जून से 8 जुलाई तक ‘सेफ क्लिक-2’ जागरूकता अभियान
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। फर्जी दस्तावेजों के जरिए बड़ी संख्या में सिम कार्ड जारी करने वाले नेटवर्क का खुलासा होने के बाद राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय अब ‘ऑपरेशन फेस-2’ शुरू करने जा रहा है।
अभियान के तहत उन लोगों की पहचान की जाएगी जिन्होंने थोक में सिम कार्ड खरीदे या दूसरों को उपलब्ध कराए। साथ ही यह भी जांच होगी कि सिम कार्ड आखिरकार किसके पास पहुंचे, उनका वास्तविक उपयोगकर्ता कौन था और उनका इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया गया।
‘ऑपरेशन फेस’ में सामने आया फर्जीवाड़ा
गौरतलब है कि इससे पहले चलाए गए ‘ऑपरेशन फेस’ में एक ही व्यक्ति की फोटो का उपयोग कर कई फर्जी पहचान दस्तावेज तैयार कर सिम कार्ड जारी कराने का बड़ा नेटवर्क सामने आया था। जांच में अब तक 135 चेहरों के आधार पर 36,668 सिम कार्ड जारी होने की जानकारी मिली है। इनमें सबसे बड़ा मामला रीवा और सतना का सामने आया, जहां 2020 से 2022 के बीच एक व्यक्ति की फोटो से फर्जी दस्तावेज बनाकर 2,279 सिम कार्ड जारी कर दिए गए थे।
साइबर पुलिस मुख्यालय के अनुसार, इस मामले में प्रदेश के विभिन्न जिलों में अब तक 33 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। रीवा, सतना और मुरैना जैसे जिलों में फर्जी सिम कार्ड जारी होने के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि ऐसे फर्जी सिम कार्डों का इस्तेमाल साइबर ठगी, ऑनलाइन धोखाधड़ी, म्यूल खाते खुलवाने, ओटीपी प्राप्त करने और अन्य अवैध गतिविधियों में किया जाता है। जिन जिलों में फर्जी सिम कार्डों की संख्या अधिक पाई गई है, वहां म्यूल खातों की संख्या भी अपेक्षाकृत ज्यादा मिली है।
24 जून से शुरू होगा ‘सेफ क्लिक-2’ अभियान
साइबर अपराधों के प्रति आमजन को जागरूक करने के लिए पुलिस मुख्यालय 24 जून से 8 जुलाई तक 15 दिवसीय ‘सेफ क्लिक-2’ अभियान चलाएगा।
इसके तहत स्कूलों, कॉलेजों, कोचिंग संस्थानों, सरकारी कार्यालयों, औद्योगिक इकाइयों और सार्वजनिक स्थलों पर साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। नागरिकों को साइबर सुरक्षा की शपथ दिलाने के साथ क्यूआर कोड और अन्य माध्यमों से सुरक्षा संदेश भी पहुंचाए जाएंगे।
