नईदुनिया प्रतिनिधित, बैतूल। जिले के घोड़ाडोंगरी विधानसभा क्षेत्र में आने वाले ग्राम लखीपुर से झोली तक की 1.8 किमी कच्ची सड़क ग्रामीणों और स्कूली बच्चों के लिए आफत बन रही है। चोपना क्षेत्र के आसपास के करीब 12 गांवों के स्कूली बच्चों को वर्षों से खराब सड़क की समस्या से जूझना पड़ रहा है।
मंगलवार को अपनी परेशानी को लेकर बड़ी संख्या में बच्चे चोपना से 70 किमी दूरी तय कर बैतूल पहुंचे और कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया।
लखीपुर से झोली-1 तक पक्की सड़क निर्माण की मांग रखी
बच्चों ने लखीपुर से झोली-1 तक पक्की सड़क निर्माण की मांग रखी। बच्चों की समस्या सुनने के बाद कलेक्टर ने उनसे चर्चा की और सड़क निर्माण को लेकर आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया। ग्रामीण वासुदेव शाह समेत अन्य ने बताया कि लखीपुर से झोली-1 तक करीब 1.8 किलोमीटर सड़क पिछले लगभग 30 वर्षों से कच्ची ही है।
यह मार्ग चिकलपाटी, लखीपुर, झोली-1, सैय्यागुड्डी, माड़काढाना, कुण्डी, मांडूखेड़ा, रामपुर, भातोड़ी, घोगरा, टेमरू, कुकरपानी, पीपलढाना और बिजना सहित आसपास के गांवों के ग्रामीणों के लिए चोपना आने-जाने का प्रमुख संपर्क मार्ग है।
जलभराव से बच्चों को स्कूल पहुंचने में काफी परेशानी होती है
सड़क की हालत खराब होने का सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। वर्षाकाल में सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे, कीचड़ और जलभराव होने से बच्चों को स्कूल पहुंचने में काफी परेशानी होती है। कई बार उन्हें फिसलन और पानी से भरे रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है।
मरीजों को चोपना तक ले जाना मुश्किल हो जाता है
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क खराब होने के कारण बच्चों की पढ़ाई और नियमित स्कूल पहुंचने पर भी असर पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि यह मार्ग केवल स्कूली बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि किसानों, महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।
खराब सड़क के कारण आपात स्थिति में मरीजों को चोपना तक ले जाना मुश्किल हो जाता है। किसानों को भी कृषि कार्य और उपज को बाजार तक पहुंचाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
कई बार आवेदन, फिर भी नहीं हुआ स्थायी समाधान
ग्रामीणों के मुताबिक सड़क निर्माण को लेकर पूर्व में भी कई बार प्रशासन को आवेदन दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। करीब तीन दशक से पक्की सड़क का इंतजार कर रहे ग्रामीणों ने अब बच्चों के माध्यम से अपनी आवाज प्रशासन तक पहुंचाई है।
70 किमी की दूरी तय कर बैतूल में कलेक्ट्रेट पहुंचे
मंगलवार को स्कूल जाने वाले बच्चे अपने अभिभावकों के साथ खस्ताहाल सड़क पर एकत्र हुए और जिम्मेदारों के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद वे सभी वाहनों से 70 किमी की दूरी तय कर बैतूल में कलेक्ट्रेट पहुंचे। स्कूल आने जाने में कच्ची सड़क की समस्या से परेशान छात्राओं ने हाथों में पक्की सड़क बनाने, हमारी मांग तुरंत सुनने जैसे स्लोगन लिखी तख्ती थाम रखी थी।
कलेक्टर ने ग्रामीणों और विद्यार्थियों को चैंबर में बुलाकर चर्चा की
कलेक्टर ने ग्रामीणों और विद्यार्थियों को अपने चैंबर में बुलाकर चर्चा की। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि समस्या को दूर करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। स्कूल जाने के लिए एक और मार्ग पहले से उपलब्ध है। लखीपुर से झोली-1 तक पक्की सड़क का सर्वे कराकर समस्या हल की जाएगी। ग्रामीणों ने कलेक्टर से कहा कि पक्की सड़क बनने तक मार्ग की तत्काल मरम्मत, गड्ढों की भराई और समतलीकरण कराया जाए।
भडंगा नदी पर पुल बनाने की भी मांग
छात्र रोहित मंडल, छात्रा किरण पोद्दार ने कलेक्टर को बताया कि झोली क्रमांक एक से लखीपुर जाने वाला मार्ग कच्चा है जिससे 14 गांव के बच्चे चोपना तक स्कूल जाते हैं। इसी मार्ग पर भडंगा नदी पड़ती है जिस पर कम ऊंचाई की पुलिया होने से हल्की बारिश में भी पुल पर पानी आ जाता है और आवागमन बंद हो जाता है।
विद्यार्थियों ने मांग की है कि भडंगा नदी की पुलिया की ऊंचाई भी बढ़ाई जाए ताकि आवागमन में हो रही परेशानी दूर हो सके।
चिखलीमाल में भी विकास के दावों की खुल रही पोल
घोड़ाडोंगरी तहसील के ग्राम चिखलीमाल, मोरनढाना और कालीमाटी में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली ने विकास के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव में सड़क की स्थिति इतनी खराब है कि वर्षाकाल में यह कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो जाती है, जिससे एंबुलेंस भी गांव नहीं पहुंच पाती। मरीजों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने में भारी परेशानी होती है।
भैंसदेही के पूर्व विधायक धरमू सिंह सिरसाम, जिला पंचायत सदस्य राजेंद्र कवड़े और जनपद पंचायत उपाध्यक्ष ज्ञानसिंह परते ने मंगलवार को कलेक्टर से समस्याओं के शीघ्र निराकरण की मांग की। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का स्थायी समाधान किया जाए।
चोपना स्कूल के बच्चे और ग्रामीणों ने सड़क की समस्या बताई है। पहले से एक और मार्ग उपलब्ध है। दूसरे कम दूरी वाले मार्ग को पक्का बनाने के लिए आश्वस्त कर दिया गया है। बच्चों को स्कूल न भेजकर इतनी दूर लेकर आने पर समझाइश दी गई है। एसडीएम और जनपद सीईओ को समस्या को दूर करने के लिए निर्देश दिए गए हैं।
-डॉ सौरभ संजय सोनवणे, कलेक्टर बैतूल
