नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर के चार सालों के शोध के आधार पर ‘महाकौशली गाय’ को राष्ट्रीय स्तर पर देश की 57वीं पंजीकृत देसी गो…और पढ़ें

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश की समृद्ध पशुधन विरासत को एक बड़ी राष्ट्रीय पहचान मिली है। जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय (NDVSU) के वैज्ञानिकों के लंबे शोध के बाद ‘महाकौशली गाय’ को देश की 57वीं पंजीकृत देसी गोवंश नस्ल के रूप में आधिकारिक मान्यता मिल गई है। आईसीएआर (ICAR)-राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, करनाल की नस्ल पंजीकरण समिति की बैठक में इस स्वतंत्र देसी नस्ल पर मुहर लगाई गई।
2018 से शुरू हुआ था गहन शोध
महाकौशली गाय को एक अलग नस्ल के रूप में स्थापित करने के लिए साल 2018 से 2022 के बीच विस्तृत अध्ययन किया गया।
- वैज्ञानिक अध्ययन: विश्वविद्यालय के पशु आनुवंशिकी एवं प्रजनन विभाग के प्राध्यापक एवं अध्यक्ष डॉ. मोहन सिंह ठाकुर के नेतृत्व में शोध कार्य हुआ।
- डाटा संकलन: शोध टीम ने इस नस्ल के शारीरिक, आनुवंशिक और नस्लीय लक्षणों का अध्ययन किया और क्षेत्रीय स्तर पर पशुधन के आंकड़े जुटाए।
- ब्रीड डिस्क्रिप्टर: वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर गाय का ‘ब्रीड डिस्क्रिप्टर’ तैयार कर राष्ट्रीय स्तर पर औपचारिक आवेदन भेजा गया था।
आंकड़ों के सत्यापन के बाद मिली पहचान
राष्ट्रीय स्तर की विशेषज्ञ समिति ने प्रस्तुत वैज्ञानिक और आनुवंशिक प्रमाणों का गहन परीक्षण और सत्यापन किया। जांच में पाया गया कि महाकौशली गाय के गुण देश की अन्य पंजीकृत देसी नस्लों से अलग और विशिष्ट हैं।
इस आधिकारिक पंजीकरण के बाद अब महाकौशली गोवंश के संरक्षण, नस्ल संवर्धन और वैज्ञानिक पद्धति से प्रजनन के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
