मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच द्वारा भोजशाला को मंदिर से जुड़ा स्थल मानने के बाद श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। …और पढ़ें

HighLights
- महिलाओं और बच्चियों ने भी भोजशाला में किए दर्शन
- धार्मिक चित्र अंदर ले जाने से श्रद्धालुओं को रोका गया
- सुरक्षा कर्मियों ने आदेश नहीं मिलने की जानकारी दी
नईदुनिया प्रतिनिधि, धार। मध्यप्रदेश के धार स्थित भोजशाला (Dhar Bhojshala Dispute) परिसर को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में इंदौर स्थित हाईकोर्ट की बेंच ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने ऐतिहासिक तथ्यों, एएसआई रिपोर्ट और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए भोजशाला को मंदिर के रूप में स्वीकार किया, जिसके बाद श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने भोजशाला में हनुमान चालीसा का पाठ भी किया।
महिलाएं और बच्चियां भी पहुंचीं दर्शन के लिए
शनिवार को भोजशाला परिसर में दर्शन करने पहुंचे लोगों में महिलाएं और बच्चियां भी शामिल थीं। कई श्रद्धालु अपने साथ हनुमान जी और मां सरस्वती के चित्र लेकर पहुंचे थे। श्रद्धालुओं ने इन धार्मिक चित्रों को परिसर के अंदर ले जाने का प्रयास किया, लेकिन वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें रोक दिया।
सुरक्षा कर्मियों ने आदेश नहीं मिलने की कही बात
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की अनुबंध एजेंसी के सुरक्षाकर्मियों ने श्रद्धालुओं को बताया कि उन्हें अभी तक हाई कोर्ट के किसी नए आदेश या निर्देश की जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। ऐसे में मौजूदा नियमों के अनुसार ही व्यवस्था संचालित की जा रही है।
भोज उत्सव समिति ने भी संयम बरतने की अपील की
भोज उत्सव समिति के पदाधिकारियों ने भी कहा कि वे हाई कोर्ट के विस्तृत निर्देश और आधिकारिक आदेश मिलने के बाद ही आगे की रणनीति तय करेंगे। समिति ने श्रद्धालुओं से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की।
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नियमों का सम्मान करते हुए लौटे श्रद्धालु
चित्र अंदर ले जाने की अनुमति नहीं मिलने के बाद हिंदू समाज के लोगों ने किसी प्रकार का विरोध प्रदर्शन नहीं किया। श्रद्धालुओं ने नियमों का सम्मान करते हुए शांतिपूर्वक परिसर से वापस लौटना उचित समझा। पूरे घटनाक्रम के दौरान स्थिति सामान्य और शांतिपूर्ण बनी रही।
