नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जबलपुर में शनिवार को भारतीय न्यायपालिका के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय लिखा गया। MP हाईकोर्ट की ओर से आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार ने देश में न्यायिक डिजिटल सुधारों को नई दिशा देने का काम किया। इस विशेष आयोजन का उद्घाटन भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस कल्चरल एंड इन्फॉर्मेशन सेंटर में दीप प्रज्वलित कर किया।
डिजिटल फ्यूजन समय की जरूरत : CJI सूर्यकांत
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका में बिखरे डिजिटल प्रयासों को एक मंच पर लाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि तकनीक का उद्देश्य केवल कागजों की बचत करना नहीं, बल्कि देश के अंतिम व्यक्ति तक त्वरित, पारदर्शी और सुलभ न्याय पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से मामलों के निपटारे में अभूतपूर्व तेजी आएगी। सीजेआई ने नर्मदा नदी का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे कई छोटी नदियां मिलकर नर्मदा को विशाल बनाती हैं, उसी तरह अलग-अलग सॉफ्टवेयर और तकनीकी प्रयास मिलकर न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाएंगे।
“मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बहुत जल्दी कर दिखाया”
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि उन्होंने 14 नवंबर को झारखंड हाईकोर्ट में कहा था कि न्यायिक व्यवस्था को अस्पतालों की तरह तकनीकी रूप से सक्षम होना चाहिए, जहां एक ही स्थान पर सभी जरूरी जानकारी उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बहुत कम समय में इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर दिखाया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पहल केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए। इस दिशा में जल्द कदम उठाने की बात भी उन्होंने कही।
एआई कमेटी के काम का जल्द दिखेगा असर
सीजेआई ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश बनने के बाद उन्होंने सबसे पहले एआई कमेटी का गठन किया था। यह समिति त्वरित न्याय प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए काम कर रही है और इसके परिणाम जल्द सामने आएंगे।
उन्होंने कोविड काल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस कठिन समय में कई व्यवस्थाएं ठप हो गई थीं, लेकिन भारतीय न्यायपालिका ने तकनीक के सहारे अपनी सेवाएं जारी रखीं। उन्होंने कहा कि वैश्विक न्यायपालिका भारत की इस क्षमता पर गर्व करती है।
“फ्रेगमेंटेशन टू फ्यूजन” रहा मुख्य विषय
राष्ट्रीय सेमिनार का विषय “फ्रेगमेंटेशन टू फ्यूजनः एम्पॉवरिंग जस्टिस वाया यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन” रखा गया था। Justice Sanjeev Sachdeva ने इस विषय पर प्रेजेंटेशन प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा समझाई।
स्वागत भाषण में उन्होंने कहा कि केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म न्याय को अंतिम छोर तक पहुंचाने में बेहद प्रभावी साबित होगा।
दिग्गजों की मौजूदगी से बढ़ी गरिमा
कार्यक्रम में CM मोहन यादव और केंद्रीय कानून राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा, जस्टिस पीबी वारले, जस्टिस एन कोटेश्वर सिंह, जस्टिस आलोक अराधे सहित कई वरिष्ठ न्यायाधीश और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के सभी जज कार्यक्रम में मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री और कानून मंत्री ने सराहा प्रयास
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार न्यायपालिका के डिजिटल अपग्रेडेशन में हर संभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने रानी अहिल्याबाई के न्याय प्रशासन और विक्रम-वेताल की कहानियों का उल्लेख करते हुए न्याय व्यवस्था की महत्ता बताई।
केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि यह पहल “ईज ऑफ जस्टिस” की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि दुनिया में पहली बार मूक-बधिरों के लिए न्यायपालिका में डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस तरह उपयोग किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और जनता का विश्वास दोनों बढ़ेंगे।
डिजिटल तकनीक का उद्देश्य कागज़ों को कम करना नहीं, अंतिम छोर पर बैठे नागरिक तक त्वरित, पारदर्शी और सुलभ न्याय पहुंचाना है सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, हाईकोर्ट के सेमिनार का किया उद्घाटन, सीएम मोहन यादव व कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल सहित सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के जज रहे मौजूद
न्यायपालिका में जजों की कमी पर भी चर्चा
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और जिला अदालतों में जजों की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने हाईकोर्ट में 25 अतिरिक्त जजों की नियुक्ति के लंबित प्रस्ताव को जल्द मंजूरी देने की मांग की। वहीं जस्टिस एन कोटेश्वर सिंह ने कहा कि न्यायिक इतिहास फाउंटेन पेन से शुरू होकर अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक पहुंच चुका है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में बच्चों को किया सम्मानित
कार्यक्रम के अंत में मातृ दिवस पर हाईकोर्ट में आयोजित सांस्कृतिक प्रतियोगिता के विजेता बच्चों को सीजेआई सूर्यकांत ने सम्मानित किया। पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे।
