विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में भा …और पढ़ें

HighLights
- दलबदल पर हाई कोर्ट का फैसला सुरक्षित।
- केस सप्रे की राजनीतिक स्थिति तय करेगा।
- साथ ही प्रदेश में महत्वपूर्ण नजीर बन सकता है।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने गुरुवार को मध्य प्रदेश की राजनीति से जुड़े बहुचर्चित दलबदल प्रकरण में सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता समाप्त करने की मांग वाली याचिका पर हुई सुनवाई के बाद अब सभी की निगाहें कोर्ट के फैसले पर टिक गई हैं। आने वाले दिनों में निर्णय सुनाया जा सकता है।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में भाग लेकर दलबदल कानून का उल्लंघन किया है। याचिका में उनकी विधानसभा सदस्यता शून्य घोषित करने की मांग की गई है।
दरअसल, मामले ने तब और गंभीर स्वरूप ग्रहण कर लिया था जब पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित कार्रवाई में हो रही देरी पर तीखी नाराजगी व्यक्त की थी। न्यायालय ने स्पष्ट पूछा था कि जब दलबदल संबंधी मामलों में सुप्रीम कोर्ट 90 दिनों के भीतर निर्णय का मानक तय कर चुका है, तब लगभग दो वर्ष बाद भी अंतिम निर्णय क्यों नहीं हो पाया।
याचिका के अनुसार, 30 जून 2024 को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष दलबदल संबंधी आवेदन प्रस्तुत किया गया था। आरोप है कि लोकसभा चुनाव के दौरान पांच मई 2024 को मुख्यमंत्री मोहन यादव के राहतगढ़ कार्यक्रम में सार्वजनिक रूप से भाजपा के मंच पर पहुंचकर निर्मला सप्रे ने अपनी राजनीतिक निष्ठा बदलने का संकेत दिया था। इसके बावजूद उन्होंने विधायक पद से त्यागपत्र नहीं दिया।
अब हाई कोर्ट का सुरक्षित फैसला न केवल निर्मला सप्रे की राजनीतिक स्थिति तय करेगा, बल्कि प्रदेश में दलबदल कानून के अनुपालन को लेकर भी महत्वपूर्ण नजीर बन सकता है।
मामला एक नजर में
-विधायक : निर्मला सप्रे (बीना)
-याचिकाकर्ता : उमंग सिंघार, नेता प्रतिपक्ष
-मांग : सदस्यता समाप्त करने का आदेश
-कोर्ट की पूर्व टिप्पणी : 90 दिन की सीमा के बावजूद देरी पर सवाल
-ताजा स्थिति : सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित।
