MP High Court: हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने भाजपा विधायक संजय पाठक के खिलाफ कथित मानहानिकारक बयानों के मामले में राज्य स …और पढ़ें

HighLights
- BJP विधायक संजय पाठक की बढ़ीं मुश्किलें
- मानहानि के आरोप पर हाई कोर्ट सख्त
- सरकार से पूछा- अब तक क्या किया
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने भाजपा विधायक संजय पाठक के खिलाफ कथित मानहानिकारक बयानों के मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।
कोर्ट ने कटनी के आर्म्स डीलर नाजिम खान की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए राज्य शासन को शिकायत पर की गई कार्रवाई की जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई छह जुलाई को नियत की गई है।
14 हजार कारतूस गायब होने और अवैध हथियारों की बिक्री का आरोप
याचिकाकर्ता नाजिम खान का आरोप है कि विधायक संजय पाठक ने सार्वजनिक रूप से ऐसे बयान दिए, जिनसे उनकी प्रतिष्ठा को गंभीर क्षति पहुंची।
याचिका में कहा गया है कि विधायक ने नाजिम के स्टॉक से 14 हजार कारतूस गायब होने, अवैध हथियारों की बिक्री तथा आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के हथियार लाइसेंस बनवाने जैसे आरोप लगाए थे। याचिकाकर्ता ने इन बयानों को झूठा, निराधार और मानहानिकारक बताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
याचिका के अनुसार, इन आरोपों के संबंध में पुलिस और प्रशासन को शिकायतें दी गईं, लेकिन न तो एफआईआर दर्ज की गई और न ही किसी प्रकार की जांच शुरू हुई। इसी कथित निष्क्रियता को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की गई है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले को विचारणीय मानते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा। अब छह जुलाई को होने वाली सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई हुई और याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए प्रश्नों पर शासन का क्या पक्ष है। यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दूसरी बार खुद को अलग कर चुके हैं जस्टिस विशाल मिश्रा
भाजपा विधायक संजय पाठक से जुड़े मामलों की सुनवाई से हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा दूसरी बार स्वयं को अलग कर चुके थे। इससे पूर्व सितंबर 2025 में उन्होंने एक अन्य प्रकरण में यह कहते हुए सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था कि विधायक की ओर से उनसे फोन पर संपर्क का प्रयास किया गया था। बाद में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने इस मामले में आपराधिक अवमानना की कार्यवाही प्रारंभ करने के आदेश दिए थे। मामला अभी लंबित है।
