राजस्थान पुलिस को भी अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया था। इधर, तीनों कार्यकर्ताओं को जमानत मिल चुकी है, लेकिन उनकी गिरफ्तारी और हिरासत की वैधता को लेकर उ …और पढ़ें

HighLights
- हाई कोर्ट ने सात जुलाई तय की अगली तारीख
- मध्य प्रदेश और राजस्थान पुलिस को जवाब देना होगा
- मामला उस बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से जुड़ा है
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट में गुरुवार को राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के नाम से वायरल कथित फर्जी पत्र के मामले में कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर उठे अवैध हिरासत के आरोपों पर सुनवाई नहीं हो सकी। कर्ट ने मामले की अगली सुनवाई सात जुलाई को निर्धारित की है। तब तक मध्य प्रदेश और राजस्थान पुलिस को अपना जवाब प्रस्तुत करना होगा।
प्रक्रिया का पालन किए बिना हिरासत में रखा गया
दरअसल, मामला उस बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से जुड़ा है, जिसमें भोपाल के खिजर खान व अन्य ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े निखिल, बिलाल और इनाम को अप्रैल में भोपाल से उठाए जाने के बाद दो दिनों तक विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन किए बिना हिरासत में रखा गया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि युवकों को समय पर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया गया।
युवकों ने अवैध हिरासत का आरोप दोहराया था
प्रकरण ने पिछली सुनवाई में तब नया मोड़ ले लिया था, जब राजस्थान पुलिस तीनों युवकों को हाई कोर्ट में पेश करने के लिए बाध्य हुई। न्यायालय द्वारा दर्ज किए गए बयानों में युवकों ने अवैध हिरासत का आरोप दोहराया था।
शिकायत मानकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करें
इन बयानों पर गौर करने के बाद कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि प्रथम दृष्टया मामला अवैध हिरासत का प्रतीत होता है।
युगलपीठ ने भोपाल पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया था कि युवकों के बयानों को शिकायत मानकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करें तथा रिपोर्ट प्रस्तुत करें। अब निगाहें सात जुलाई की सुनवाई पर टिक गई हैं, जब दोनों राज्यों की पुलिस को अदालत के समक्ष जवाबदेह होना होगा।
