हाई कोर्ट ने छिंदवाड़ा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. नरेश गुन्नाड़े को मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव द्वारा किए गए निलंबन के मामले में राहत …और पढ़ें

HighLights
- सीएम के फैसले पर हाई कोर्ट का रोक से इनकार
- प्रसूति सहायता राशि नहीं मिलने की शिकायत पर हुई थी कार्रवाई
- कोर्ट में 10 दिन में विभागीय अपील के निर्देश
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने छिंदवाड़ा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. नरेश गुन्नाड़े को मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव द्वारा किए गए निलंबन के मामले में राहत नहीं दी है। न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए उन्हें पहले विभाग के समक्ष वैधानिक अपील दाखिल करने के निर्देश दिए।
प्रसूति सहायता राशि न मिलने पर सस्पेंड हुए डॉ. गुन्नाड़े
मामला सीमा तुमराम को प्रसूति सहायता राशि नहीं मिलने की शिकायत से जुड़ा है। शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर पहुंची थी। मुख्यमंत्री ने आठ अगस्त, 2026 को छिंदवाड़ा प्रवास के दौरान सार्वजनिक रूप से मुख्य चिकित्सा अधिकारी के निलंबन की घोषणा की थी।
इसके बाद डा. गुन्नाड़े को छिंदवाड़ा से करीब 307 किलोमीटर दूर कटनी स्थित कार्यालय में संलग्न किया गया। याचिकाकर्ता ने निलंबन को चुनौती देते हुए कहा था कि आठ अगस्त को महीने का दूसरा शनिवार और सरकारी अवकाश था।
आरोप लगाया गया कि अवकाश के दिन जल्दबाजी और कथित राजनीतिक दबाव में कार्रवाई की गई। सुनवाई में शासन की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने कहा कि मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम के नियम 23 के तहत निलंबन के विरुद्ध विभागीय अपील का वैधानिक प्रविधान है।
कोर्ट में 10 दिन में विभागीय अपील के निर्देश
इसलिए पहले विभागीय उपाय अपनाया जाना चाहिए। हाई कोर्ट ने डा. गुन्नाड़े को 10 दिन में अपील प्रस्तुत करने और संबंधित विभाग को 60 दिन में उसका विधि अनुसार निराकरण करने का निर्देश दिया। इस तरह कोर्ट ने निलंबन आदेश पर सीधे हस्तक्षेप नहीं किया।
