नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल पर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। शासन ने स्पष्ट किया है कि स्वास्थ्य सेवाएं अति आवश्यक सेवाओं की श्रेणी में आती हैं और इनमें किसी भी प्रकार की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकार ने हड़ताली कर्मचारियों को चेतावनी दी है कि जो भी संविदाकर्मी 5 जून तक ड्यूटी पर वापस नहीं लौटेगा, उसकी संविदा सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी जाएगी।
स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य रूप से संचालित हो रही
सरकार के अनुसार प्रदेश में आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं। नौ जिलों में एक भी कर्मचारी हड़ताल में शामिल नहीं हुआ है। वहीं एक जिले को छोड़कर प्रदेश के सभी जिलों में संविदा चिकित्सा अधिकारी भी हड़ताल से दूर रहकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कुछ जिलों में सीमित स्तर पर कर्मचारियों के हड़ताल पर रहने की स्थिति में नियमित कर्मचारियों के माध्यम से वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।
सीएमएचओ के माध्यम से जारी किए गए नोटिस
मानव संसाधन मैन्युअल-2025 का हवाला देते हुए सरकार ने कहा है कि कोई भी संविदा कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकता और न ही किसी अन्य कर्मचारी को इसके लिए प्रेरित कर सकता है। ऐसा करना कदाचार की श्रेणी में माना जाएगा।
वैधानिक नोटिस तामील कराए गए
एनएचएम स्तर से सभी कर्मचारियों को व्यक्तिगत नोटिस जारी करना संभव नहीं होने के कारण प्रत्येक जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) के माध्यम से हड़ताली कर्मचारियों को वैधानिक नोटिस तामील कराए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बाद बिना किसी अतिरिक्त सूचना के सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जाएगी।
शासन ने कर्मचारियों से मरीजों और आमजन के हितों को प्राथमिकता देते हुए तत्काल ड्यूटी पर लौटने की अपील की है। साथ ही कहा है कि समयसीमा के बाद अनुपस्थित पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ होने वाली कार्रवाई के लिए वे स्वयं जिम्मेदार होंगे।
जेपी अस्पताल में तीसरे दिन भी जारी रही हड़ताल
इधर भोपाल के जेपी अस्पताल परिसर में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल गुरुवार को तीसरे दिन भी जारी रही। संविदाकर्मी नेता राकेश मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2023 में बनाई गई संविदा नीति को प्रभावी रूप से लागू नहीं किया गया है, जिसके विरोध में कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं।
कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई
उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में संविदा कर्मचारियों के हित में नीति बनाई गई थी, लेकिन उसके बाद उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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