नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश में छोटी मुद्रा की कमी आम लोगों और छोटे कारोबारियों के लिए अब परेशानी बनती जा रही है। बाजारों में पांच से 10, 20 रुपये के सिक्कों एवं नोटों की कमी के चलते रोजमर्रा के लेन-देन प्रभावित हो रहे हैं।
इस मुद्दे को लेकर मानव अधिकार एवं अपराध नियंत्रण संगठन ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) के गवर्नर को ज्ञापन भेजकर प्रदेश में चिल्लर संकट दूर करने और इसकी कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की है।
छोटे नोट एवं सिक्के आसानी से उपलब्ध नहीं
संगठन ने बताया कि प्रदेश के कई शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे नोट एवं सिक्के आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर छोटे व्यापारियों, किराना दुकानदारों, मेडिकल स्टोर्स, बस-ऑटो संचालकों और दैनिक लेन-देन करने वाले लोगों पर पड़ रहा है।
छुट्टे पैसे को लेकर विवाद की स्थिति भी बन रही
कई जगह उपभोक्ताओं और दुकानदारों के बीच छुट्टे पैसे को लेकर विवाद की स्थिति भी बन रही है। संगठन ने यह आरोप भी लगाया कि कुछ स्थानों पर चिल्लर की कृत्रिम कमी पैदा कर उसकी जमाखोरी और अवैध रूप से सप्लाई की जा रही है। इसके कारण बाजार में छोटे मूल्य की मुद्रा का संकट लगातार गहराता जा रहा है।
ज्ञापन में मांग की गई है कि चिल्लर की कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ विशेष कानून या कठोर कानूनी प्रावधान बनाए जाएं, ताकि दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई हो सके। संगठन के संरक्षक डॉ. आमित सिसोदिया, डॉ. अजय वाधवानी, एडवोकेट भावना निगम, एडवोकेट आशीष त्रिपाठी, डॉ. अभिषेक जैन, डॉ. आनंद बेहरानी, एडवोकेट रोशन मंध्यानी, एडवोकेट अमित खत्री, एडवोकेट अमित शर्मा, डॉ. कमल विश्वास, डॉ. श्रीकांत साहू सहित संगठन के कई पदाधिकारी मौजूद रहे।