बलरामपुर जिले के कुसमी विकासखंड अंतर्गत भैंसापाठ गांव में सड़क और पुलिया न होने के कारण 58 वर्षीय बीमार महिला रदनी को स्वजन ने झेलगी पर लादकर मुख्य सड…और पढ़ें

HighLights
- सड़क और पुलिया न होने से एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी गांव।
- झारखंड के महुआडांड़ अस्पताल में 58 वर्षीय महिला का चल रहा उपचार।
- स्वजन ने नहीं किया था 108 या 102 एंबुलेंस सेवा पर संपर्क।
नईदुनिया न्यूज,बलरामपुर : विकासखण्ड कुसमी के ग्राम पंचायत अमरपुर अंतर्गत ग्राम भैंसापाठ की एक 58 वर्षीय महिला मरीज को बीमार हालत में झेलगी पर लादकर उपचार के लिए ले जाना पड़ा। इंटरनेट मीडिया पर वीडियो प्रसारित होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि सड़क और पुलिया नहीं होने से यह समस्या सामने आई है। बलरामपुर के सीएमएचओ ने बताया कि गांव तक खराब सड़क और नाले पर पुलिया नहीं होने के कारण एंबुलेंस नहीं पहुंच पाई। स्वजन ने भी 108 और 102 सेवा या स्वास्थ्य कार्यकर्ता से संपर्क नहीं किया, जिसके बाद स्वजन मरीज को झेलगी के सहारे मुख्य सड़क तक ले गए।
जानकारी के अनुसार बलरामपुर जिले के ग्राम पंचायत अमरपुर के ग्राम भैंसापाठ निवासी 58 वर्षीय रदनी को सर्दी, खांसी और कमजोरी की शिकायत थी। उपचार के लिए स्वजन उन्हें घर से अस्पताल ले जाना चाहते थे, लेकिन गांव से लगभग दो किलोमीटर दूर तक सड़क जर्जर है और नाले पर पुलिया नहीं बनी है। खराब रास्ते और कीचड़ के कारण बड़े वाहन गांव तक नहीं पहुंच सके।
मजबूरी में स्वजन ने मरीज को झेलगी में लिटाकर कंधे के सहारे पैदल चलकर नाले की पुलिया तक पहुंचाया। वहां से निजी वाहन की मदद से मरीज को महुआडांड, झारखंड स्थित अस्पताल ले जाया गया। वहां मरीज का उपचार जारी है।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि मरीज को ले जाने के दौरान स्वजन द्वारा 108 और 102 एंबुलेंस सेवा से संपर्क नहीं किया गया था। न ही किसी स्वास्थ्य कार्यकर्ता या मितानिन को सूचना दी गई थी।
उन्होंने कहा कि भैंसापाठ गांव से लगभग दो किलोमीटर की दूरी तक सड़क की स्थिति खराब है और नाले पर पुलिया का अभाव है। इसी कारण बड़े वाहनों का आवागमन संभव नहीं हो पाता है।ग्रामीणों का कहना है कि भैंसापाठ जैसे दूरस्थ गांवों में सड़क और पुल-पुलिया नहीं होने से आपातकाल में मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।
झेलगी पर मरीज को ले जाने का यह वीडियो एक बार फिर क्षेत्र में बुनियादी स्वास्थ्य और सड़क सुविधाओं की कमी को उजागर करता है। स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि भविष्य में ऐसी स्थिति न हो इसके लिए आशा और मितानिन कार्यकर्ताओं को एंबुलेंस सेवा की जानकारी देने के लिए निर्देशित किया जाएगा।
