नईदुनिया ने इस मामले में पिछले दिनों शहर के दो दलाल मनोज मंगनानी और मोहित जैन से ग्राहक बनकर आन रिकार्डिंग पड़ताल की थी जिसमें मनोज मंगनानी ने यह दावा …और पढ़ें

HighLights
- लाइसेंस बनवाने को लेकर दलाल ने बताई थी ड्रग इंस्पेक्टर से साठगांठ
- मामले की गूंज भोपाल पहुंचने के बाद छीना प्रभार
- अनुभूति शर्मा को दोबारा मिली जिम्मेदारी
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर में रुपये लेकर ड्रग लाइसेंस बनाए जाने के नेटवर्क का पर्दाफाश होने के बाद शासन ने दतिया जिले के ड्रग इंस्पेक्टर उमेश रामचंदानी के पास से ग्वालियर का अतिरिक्त चार्ज हटा दिया। इसको लेकर आदेश जारी कर दिए गए हैं और ड्रग इंस्पेक्टर अनुभूति शर्मा को दोबारा जिम्मेदारी मिल गई है।
नईदुनिया ने इस मामले में पिछले दिनों शहर के दो दलाल मनोज मंगनानी और मोहित जैन से ग्राहक बनकर आन रिकार्डिंग पड़ताल की थी जिसमें मनोज मंगनानी ने यह दावा किया था कि ड्रग इंस्पेक्टर उमेश रामचंदानी से उनकी पूरी सेटिंग है और 61 हजार रुपये में मय फार्मासिस्ट लाइसेंस बनकर मिल जाएगा। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद हड़कंप मच गया और भोपाल तक हलचल हुई। शासन ने इसके बाद उमेश रामचंदानी का प्रभार हटा दिया।
बता दें कि नईदुनिया ने 27 मई के अंक में ड्रग लाइसेंस का खेल: फार्मासिस्ट के 28 हजार-इंस्पेक्टर की रिश्वत 27 हजार शीर्षक से ड्रग लाइसेंस को लेकर चल रहे सेटअप का पर्दाफाश किया था। इसमें नईदुनिया की टीम ने दवा बाजार व मेडिकल स्टोरों पर ग्राहक बनकर पड़ताल की और इसी बीच मनोज मंगनानी नाम के व्यक्ति से संपर्क किया। मनोज से मेडिकल स्टोर रिटेल लाइसेंस बनवाने के लिए बात की। कई बार मोबाइल पर बात हुई और दो से तीन बार मुलाकात की।
मनोज मंगनानी ने बताया कि ड्रग इंस्पेक्टर उमेश रामचंदानी से पूरी सेटिंग है और फार्मासिस्ट के खर्च सहित 61 हजार रुपये का खर्च आएगा। मनोज मंगनानी ने कहा कि आवेदन करना है, यह भी बताया और जल्द काम करवाने की गारंटी भी ली। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद खाद्य एवं औषधि विभाग में हड़कंप मच गया और भोपाल तक मामला पहुंचा। इसके बाद विभाग ने दतिया के ड्रग इंस्पेक्टर उमेश रामचंदानी से ग्वालियर का अतिरिक्त प्रभार छीन लिया।
कार्यालय से लौटते थे आवेदक, निरीक्षण भी बंद थे: ड्रग इंस्पेक्टर उमेश रामचंदानी की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे थे पिछले कुछ माह से निरीक्षण से लेकर सैंपलिंग की कार्रवाई भी नहीं हो रही थी और काम ठप जैसा पड़ा था। लाइसेंसिंग अथारिटी ड्रग इंस्पेक्टर रामचंदानी के पास थी और यहां आवेदन के लिए लोग आते थे तो लौट जाते थे।
