नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। भोपाल में नोयडा की ट्विशा शर्मा की रहस्यमय मौत के मामले में पिता नवनिधि शर्मा ने उच्च स्तरीय जांच पर बल दिया है। उनकी मांग है कि बिना देर किए यह प्रकरण सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जाना चाहिए। इसके लिए सीजीआई संज्ञान लें।
संवेदनशील नागरिकों से सहयोग न्याय की अपील
नवनिधि शर्मा ने एक पत्र जारी किया है, जिसमें न्यायपालिका, विधि अधिकारियों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं तथा भारत में महिलाओं को न्याय दिलाने में विश्वास रखने वाले सभी संवेदनशील नागरिकों से सहयोग की अपील की गई है।

न्याय व्यवस्था में आस्था प्रतिदिन डगमगाती जा रही है
उनका कहना है कि मैं यह अपील केवल एक शोकाकुल पिता के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे नागरिक के रूप में लिख रहा हूं, जिसकी न्याय व्यवस्था में आस्था प्रतिदिन डगमगाती जा रही है। मेरी पुत्री ट्विशा शर्मा, आयु लगभग 33 वर्ष, विवाह के कुछ ही महीनों के भीतर अत्यंत संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई।
उपभोक्ता फोरम की अध्यक्ष के रूप में पदस्थ हैं सास

प्रथम सूचना रिपोर्ट में स्वयं दहेज प्रताड़ना, मानसिक एवं शारीरिक क्रूरता, दहेज संबंधी दबाव, निरंतर अपमान तथा पति एवं सास गिरिबाला सिंह द्वारा उत्पीड़न के गंभीर आरोप अंकित हैं। गिरिबाला सिंह एक सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी हैं तथा वर्तमान में उपभोक्ता फोरम की अध्यक्ष के रूप में पदस्थ हैं।
शरीर पर अनेक मृत्यु पूर्व कुंद वस्तु से लगीं चोटें
एम्स भोपाल द्वारा जारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से निम्न तथ्य दर्ज किए गए हैं मृत्यु पूर्व फांसी। शरीर पर अनेक मृत्यु पूर्व कुंद वस्तु से लगी चोटें। विसरा एवं अन्य फॉरेंसिक नमूनों का संरक्षण, डीएनए सैंपल एवं नाखूनों के नमूनों का संग्रहण, हाल ही में हुए कथित एमटीपी के कारण गर्भाशय का संरक्षण है, जो यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि यह मामला अत्यंत गंभीर फॉरेंसिक परीक्षण एवं सावधानी की मांग करता था।
आत्म-हितकारी तर्कों के आधार पर जमानत प्रदान कर दी
भारतीय न्याय संहिता की धारा 80(2), 85, 3(5) तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धाराओं 3 एवं 4 जैसे गंभीर आरोपों के बावजूद आरोपी गिरिबाला सिंह को मुख्यतः चुनिंदा वाट्सऐप चैट, आयु संबंधी आधार तथा बहस के दौरान प्रस्तुत आत्म-हितकारी तर्कों के आधार पर जमानत प्रदान कर दी गई।
खतरनाक उदाहरण स्थापित कर सकता
मैं अत्यंत सम्मानपूर्वक निवेदन करता हूं कि ऐसा दृष्टिकोण दहेज मृत्यु मामलों की न्यायशास्त्रीय व्यवस्था में एक अत्यंत खतरनाक उदाहरण स्थापित कर सकता है।
सास आरोपी की भूमिका भी परिलक्षित होती हैं
न्यायालय ने अग्रिम जमानत आदेश में जिन चुनिंदा चैट्स पर भरोसा किया है, वे कथित सौहार्दपूर्ण संबंधों को प्रदर्शित करने हेतु प्रस्तुत की गई प्रतीत होती हैं। परंतु मेरी दिवंगत पुत्री द्वारा भेजे गए अनेक संदेश स्पष्ट रूप से यह दर्शाते हैं कि उसे निरंतर मानसिक क्रूरता, दहेज मांग, अपमान, भावनात्मक उत्पीड़न तथा प्रताड़ना का सामना करना पड़ा, जिसमें सास आरोपी की भूमिका भी परिलक्षित होती हैं।
स्थापित विधिक सिद्धांतों के विपरीत
कुछ चुनिंदा वार्तालाप किसी विवाहित महिला द्वारा अपने वैवाहिक घर में सहन की गई निरंतर क्रूरता को समाप्त नहीं कर सकते। इस मामले में और भी गंभीर विषय यह है कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम /भारतीय साक्ष्य संहिता, 2023 की धारा 118 के अंतर्गत दहेज मृत्यु से संबंधित विधिक उपधारणा की जो व्याख्या जमानत आदेश में की गई है, वह विधायी मंशा एवं स्थापित विधिक सिद्धांतों के विपरीत प्रतीत होती है।
जमानत स्तर पर निष्प्रभावी नहीं किया जाना चाहिए
विवाह के सात वर्षों के भीतर किसी महिला की अस्वाभाविक मृत्यु होने पर विधि द्वारा जो उपधारणा निर्मित की गई है, उसका उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उसे केवल कुछ पृथक अथवा चयनित डिजिटल चैट्स के आधार पर जमानत स्तर पर निष्प्रभावी नहीं किया जाना चाहिए।
विधिक उपधारणाओं को निष्प्रभावी करने का प्रयास करेगा
यदि असंबंधित अथवा चयनित वाट्सऐप चैट्स दहेज मृत्यु जैसे गंभीर अपराधों में जमानत का पर्याप्त आधार बन जाएंगी, तो भविष्य में प्रत्येक आरोपी डिजिटल कथानक निर्मित कर विधिक उपधारणाओं को निष्प्रभावी करने का प्रयास करेगा।
राष्ट्र के समक्ष एक अत्यंत पीड़ादायक प्रश्न
यह मामला राष्ट्र के समक्ष एक अत्यंत पीड़ादायक प्रश्न खड़ा करता है – क्या सामान्य नागरिकों के लिए अलग कानून है और न्यायिक तंत्र से जुड़े व्यक्तियों के लिए अलग। यदि आरोपित एक सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी तथा अधिवक्ता की माता न होतीं, तो क्या परिणाम वही रहता।
महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रभावित होने की पूर्ण संभावना
मैं एक पिता के रूप में पूछता हूं कि क्या न्यायिक व्यवस्था से जुड़े परिवार में विवाह करने वाली बेटी को विधि के समक्ष समान संरक्षण प्राप्त नहीं है। अग्रिम जमानत मिलने के पश्चात भी आरोपित भोपाल में ही निवासरत हैं, जहां गवाह, अन्वेषण तथा महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रभावित होने की पूर्ण संभावना बनी हुई है।
एम्स दिल्ली में द्वितीय पोस्टमार्टम की अनुमति
जांच को प्रभावित किए जाने की आशंका वास्तविक, गंभीर एवं न्यायोचित है। इसी बीच मैं एम्स दिल्ली में द्वितीय पोस्टमार्टम की अनुमति हेतु न्यायालयीन आदेश की प्रतीक्षा कर रहा हूं, जबकि प्रत्येक बीतते क्षण के साथ महत्वपूर्ण फारेंसिक साक्ष्य नष्ट होने का जोखिम बढ़ता जा रहा है। मेरी पुत्री का शव ऐसी स्थिति में है, जहां विघटन के कारण निष्पक्ष जांच हेतु आवश्यक वैज्ञानिक साक्ष्य अपूरणीय रूप से नष्ट हो सकते हैं।
मृत महिला की आवाज़ को दबा सकते हैं
किसी भी शोकाकुल पिता को अपनी बेटी के फारेंसिक साक्ष्यों के संरक्षण हेतु इस प्रकार न्याय की भीख नहीं मांगनी चाहिए, जबकि दूसरी ओर आरोपित विवादित तथ्यों के आधार पर राहत प्राप्त कर रहे हों। यह अपील किसी व्यक्तिगत न्यायाधीश के विरुद्ध नहीं है। यह अपील उस बढ़ती हुई धारणा के विरुद्ध है कि प्रभाव, पद एवं संस्थागत संबंध एक मृत महिला की आवाज़ को दबा सकते हैं।
जमानत आदेश की स्वतंत्र न्यायिक समीक्षा कराई जाए
अतः मैं विनम्रतापूर्वक निवेदन करता हूं कि अग्रिम पारित जमानत आदेश की स्वतंत्र न्यायिक समीक्षा कराई जाए। सभी फॉरेंसिक साक्ष्यों का तत्काल संरक्षण सुनिश्चित कर एम्स दिल्ली में द्वितीय पोस्टमार्टम की अनुमति प्रदान की जाए। गवाहों की सुरक्षा एवं जांच की स्वतंत्र निगरानी सुनिश्चित की जाए। दहेज मृत्यु संबंधी वैधानिक उपधारणाओं का निष्पक्ष एवं विधिसम्मत अनुप्रयोग किया जाए।
चुप्पी न्याय व्यवस्था की चुप्पी नहीं बननी चाहिए
यह सुनिश्चित किया जाए कि चुनिंदा इलेक्टॉनिक चैट्स व्यवस्थित क्रूरता एवं दहेज उत्पीड़न के आरोपों को कमतर न कर सकें। वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों, महिला अधिकार संस्थाओं एवं संवैधानिक प्राधिकरणों द्वारा हस्तक्षेप कर यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रभाव के कारण न्याय पराजित न हो। मेरी बेटी अब स्वयं बोल नहीं सकती। उसकी चुप्पी न्याय व्यवस्था की चुप्पी नहीं बननी चाहिए।
विलंबित न्याय पीड़ादायक होता है
मैं प्रत्येक न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता एवं नागरिक से अपील करता हूं कि कृपया इस मामले को ऐसा उदाहरण न बनने दें जहां प्रक्रियात्मक राहत एक युवा महिला की मृत्यु पर भारी पड़ जाए। विलंबित न्याय पीड़ादायक होता है। परंतु न्याय से वंचित किया जाना न्याय व्यवस्था में विश्वास को ही समाप्त कर देता है।
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