नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी के एक हाईप्रोफाइल परिवार की नवविवाहिता ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। इस संवेदनशील मामले में अब फोरेंसिक जांच, कानूनी दांव-पेंच और सामाजिक दबाव के बीच एक त्रिकोणीय संघर्ष खड़ा हो गया। एक तरफ जहां पुलिस की शुरुआती जांच रिपोर्ट ट्विशा की मौत को आत्महत्या करार दे रही थी।
बाद में पीएम रिपोर्ट में मौत से पहले चोट के निशान पाए गए और मृतका के स्वजन और पूर्व सैन्य अधिकारी इसे एक सोची-समझी साजिश (संदिग्ध मौत) मानकर निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़ गए हैं। इस बीच, पूर्व जज (ससुराल पक्ष) और मृतका के मायके वालों के बीच चल रही जुबानी जंग ने इस पूरे केस को बेहद पेचीदा बना दिया है।
फोरेंसिक रिपोर्ट और पुलिसिया कार्रवाई पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब पुलिस को ट्विशा की लिगेचर रिपोर्ट (फंदे की जांच) मंगलवार को हासिल हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्विशा की मौत उसी बेल्ट से दम घुटने के कारण हुई थी, जिसका इस्तेमाल फंदे के रूप में किया गया था।
चौंकाने वाली बात यह है कि पोस्टमॉर्टम के समय यह बेल्ट शव के साथ शामिल नहीं था। पुलिस ने घटना के दो दिन बाद इस बेल्ट को जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा था, जिसने मायके पक्ष के दावों को और मजबूत कर दिया है कि यह आत्महत्या नहीं कुछ और है।
बड़ी बहू के तलाक पर गहराया सस्पेंस
यह मामला उस वक्त और तूल पकड़ गया जब पूर्व जज गिरिबाला सिंह के वकील इनोश जॉर्ज कार्लो सोमवार को प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों के सवालों पर भड़क गए। पत्रकारों ने जब उनसे पूछा कि आखिर इस परिवार की बड़ी बहू का तलाक क्यों हुआ था? तो वकील ने असहज होकर पलटवार किया, क्या आपका तलाक नहीं हो सकता?
दरअसल, मीडिया और मृतका के मायके पक्ष का तर्क है कि यह सवाल इसलिए बेहद अहम है क्योंकि इस परिवार पर अपनी बहुओं को प्रताड़ित करने के पुराने आरोप लग रहे हैं। दूसरी ओर, पूर्व जज के वकील ने यह भी दावा किया कि उन्होंने पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण पार्सल सौंपे हैं, जो जांच की दिशा बदल सकते हैं।
रिटायर्ड जज ने कहा उन्हें देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा
दूसरी ओर, आरोपित रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह ने मंगलवार को घर पर कुछ पत्रकारों से बात की, जिसमें उन्होंने सामने आकर मायके वालों पर बेहद गंभीर और भावनात्मक आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा ट्विशा ग्लैमर की दुनिया और अपनी नौकरी से जो भी कमाती थी, उसका अधिकांश हिस्सा वह अपने माता-पिता को देती थी। उसे जीते जी तो कभी सुकून दिया नहीं और अब मौत के बाद भी उसके शव को आठ दिनों तक अंतिम संस्कार न कर रखकर उसकी आत्मा को शांति नहीं मिलने दी जा रही है।
मायके वाले उसकी मौत का इस्तेमाल सिर्फ अपना हित साधने के लिए कर रहे हैं। रिटायर्ड जज ने साफ कहा कि उन्हें देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। सरकार चाहे तो इस मामले की जांच किसी भी बड़ी केंद्रीय एजेंसी से करा ले या शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम करा ले, वे हर तरह की जांच का सामना करने को तैयार हैं।
न्याय के लिए ‘शौर्य स्मारक’ तक निकलेगी बाइक रैली
एक निजी रेस्टोरेंट में पूर्व सैन्य अधिकारियों के साथ बैठक की। अपनी बेटी के इंसाफ के लिए भटक रहे स्वजनों ने बेहद भावुक अपील करते हुए कहा कि आठ दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं दिख रही है। आरोपितों की मीडिया बयानबाजी से आहत होकर अब ट्विशा के परिवार ने सड़क पर उतरने का फैसला किया है। बुधवार को स्वजनों और पूर्व सैन्य अधिकारियों द्वारा भोपाल के शौर्य स्मारक तक एक विशाल बाइक रैली निकाली जाएगी।
इस रैली के माध्यम से ट्विशा को श्रद्धांजलि दी जाएगी और पुलिस कमिश्नर, डीजीपी, राज्यपाल व मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर मामले की उच्च स्तरीय व निष्पक्ष जांच की मांग की जाएगी। सैन्य अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि रसूखदार पृष्ठभूमि से जुड़े होने का मतलब यह नहीं कि कोई कानून से ऊपर हो जाए, दोषी चाहे जो भी हो, उसे सजा मिलनी ही चाहिए।
ट्विशा के स्वजनों और उनका साथ दे रहे पूर्व सैन्य अधिकारियों ने पुलिस की इस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पूर्व सैन्य अधिकारी श्याम श्रीवास्तव का सीधा आरोप है कि यह कोई सामान्य आत्महत्या नहीं है। उन्होंने आशंका जताई है कि ससुराल पक्ष के रसूख और प्रभाव के कारण मामले की निष्पक्ष जांच को प्रभावित किया जा रहा है।
एसआइटी पूरे मामले की जांच में लगी है, आरोपित की तलाश में स्थानों पर पुलिस पहुंची है। शव को अंतिम संस्कार के लिए पुलिस प्रयास कर रही है, पूरे मामले डीसीपी जोन 2 की निगरानी में काम कर रही है।- शैलेंद्र सिंह चौहान अतिरिक्त पुलिस आयुक्त
