नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। बरगी क्रूज हादसे के बाद नर्मदा पार बसे गांवों की दूरी भी बढ़ गई है। गौरीघाट के उस पार बसे मंगेली, सनद पिपरिया, बढ़ैयाखेड़ा सहित अन्य गांव के लाेग नाव के माध्यम से नर्मदा नदी पार कर आसानी से दो पहिया वाहन लेकर इस पार से उस पार आया करते थे।
बिना सुरक्षा प्रबंध के नावों के संचालन पर रोक लगा दी
बड़ी संख्या में ग्रामीण गांव से शहर आकर काम करते थे, कुछ व्यापार करते थे। परंतु बरगी क्रूज हादसे के बाद नगर निगम ने बिना सुरक्षा प्रबंध के नावों के संचालन पर रोक लगा दी।
नाविकों के समक्ष भी आर्थिक संकट खड़ा
करीब 16 दिन से नाव का संचालन गौरीघाट में बंद होने से ग्रामीणों को भटौली की तरफ से करीब आठ से 10 और तिलवारा तरफ से करीब 15 किमी का लंबा फेरा लगाकर आना जाना पड़ रहा है। वहीं नाविकों के समक्ष भी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। यही हाल तिलवारा घाट का यही हाल है।
50 गांव के लोगों का आवागमन बाधित
गौरीघाट में नौकाओं का संचालन बंद हो जाने से नाविक के रोजगार पर जहां संकट खड़ा हो गया है वहीं नर्मदा पार बसे करीब 50 गांव के लोगों के समक्ष आवागमन की समस्या खड़ी हो गई है।
वाहन भी दो बड़ी नावों में रखकर आते-जाते हैं
मंगेली, सिवनी टोला, नारायणपुर, मानेगांव सहित अन्य गांवों के लोग नाव के माध्यम से उस पार से इस पार कुछ तो अपने वाहन भी दो बड़ी नावों में रखकर आते-जाते हैं। इनमें दूध बेचने, रेहड़ी वाले, किसान व अधिकांश काम करने वाले श्रमिक वर्ग शामिल है।
लगाना पड़ रहा लंबा फेरा
हाल ये है कि ग्रामीणों को अब भटौली की तरफ बने नर्मदा ब्रिज से करीब आठ से 10 किमी का लंबा फेरा लगाकर गौरीघाट पहुंचना पड़ रहा है। जबकि पहले वह एक किमी का फासला तय कर नर्मदा पार कर आ जाते थे। इसी तरह सनद पिपरिया, बडैयाखेड़ा सहित अन्य गांव के लाेगों को करीब जबलपुर पहुंचने के लिए तिलवारा तरफ से करीब 15 किमी का लंबा फेरा लगाकर आना-जाना पड़ रहा है।
गुरुद्वारा भी नही जा पा रहे श्रद्धालु
नावों का संचालन न होने से मां नर्मदा के उस पार स्थापित गुरुद्वारा में मत्था टेकने वाले श्रद्धालु भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। जबकि रोजाना ही गुरुद्वारा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
नाविकों का गुजर-बसर मुश्किल
इधर नाविकों के समक्ष रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। गौरीघाट करीब 100 नावों का संचालन होता है। इनमें से लगभग 68 को ही लाइसेंस दिए गए हैं। नाविकों का गुजर बसर पर्यटकों को इस पार से उस पार लाने-जाने और पर्यटकों को नौकायान कराकर ही गुजर बसर होता है। नाविक संजीव मल्लाह ने बताया कि जब से नौकायान बंद करने के आदेश हुए है तब से नाविक बेरोजगार हो गए हैं। परिवार के समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
नौका संचालन में फंसा ये पेंच
- 100 नावों का होता है संचालन
- 68 नाविकाें को नगर निगम से लाइसेंस जारी
- 03 घाट सिद्धघाट, उमाघाट अौर नावघाट से होता है संचालन
- 10 नाविकों ने ही खरीदे लाइफ जैकेट, शेष नाविक नही खरीद पा रहे
- 700 से 900 एक लाइफ जैकेट की कीमत के कारण नही ले पा रहा नाविक
- नगर निगम प्रशासन भी बिना लाइफ जैकेट व अन्य सुरक्षा उपायों के नाव का संचालन न करने पर अडिग
भेड़ाघाट के पंचवटी में नौकायान शुरू, सुरक्षा फिर भी दांव पर
विश्व प्रसिद्ध भेड़ाघाट के पंचवटी घाट में नौकायान रविवार से आरंभ कर दिया गया है। नाव न चलने पंचवटी ,बंदर कूदनी जैसे पर्यटनीय स्थल को निहारने वाले पर्यटक भी मायूस थे। परंतु नौकायान आरंभ होने से पर्यटन जहां खुश है वहीं नाविकों के चेहरों पर भी मुस्कान लौट आई है। हालांकि पर्यटकों की सुरक्षा अब भी दांव पर ही है। क्योंकि कुछ नाविक लाइफ जैकेट के नाम पर खानापूर्ति कर ठीक से बांधने की बजाये दिखावटी तौर पर पर्यटकों को पहना रहे हैं। कुछ पुराने अौर फटे हुए भी है।
गौरीघाट में नाविकों के साथ बैठक कर सुरक्षा के पूरे इंतजाम करने के बाद ही नौकाओं का संचालन करने पर सहमति बनी है। अभी कुछ नाविक ही मानक पूरे कर रहे है। सुरक्षा मानकों के हिसाब से अब नाव का संचालन होगा। इसकी प्रक्रिया एक सप्ताह के भीतर पूरी कर लेेंगे।
पवन आसाटी, जोन अधिकारी, रामपुर
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