भोपाल में अरबों रुपये मूल्य की नवाबी संपत्तियों और शत्रु संपत्ति को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। नवाब परिवार से जुड़ी जमीनों और संपत्तियों के रि …और पढ़ें

HighLights
- सैफ और शर्मिला टैगोर समेत नवाब परिवार की संपत्तियों की होगी स्क्रूटनी
- भोपाल में अरबों की नवाबी और शत्रु संपत्ति पर फिर गहराया कानूनी पेच
- 1949 के मर्जर एग्रीमेंट के आधार पर दोबारा जांच की मांग, सौंपा ज्ञापन
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। भोपाल में अरबों रुपये मूल्य की नवाबी संपत्तियों और शत्रु संपत्ति को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। नवाब परिवार से जुड़ी जमीनों और संपत्तियों के रिकॉर्ड की दोबारा जांच कराने की मांग उठी है। इस संबंध में प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया है, जिसमें भारत सरकार और तत्कालीन भोपाल रियासत के बीच वर्ष 1949 में हुए मर्जर एग्रीमेंट को जांच का आधार बनाने की मांग की गई है। मामले में अभिनेता सैफ अली खान, शर्मिला टैगोर, सोहा अली खान और सबा अली खान समेत नवाब परिवार के अन्य सदस्यों के नाम भी चर्चा में हैं।
शत्रु संपत्तियों की पहचान और सत्यापन के लिए जांच समिति का गठन
भोपाल में शत्रु संपत्तियों की पहचान और सत्यापन को लेकर कस्टोडियन विभाग के निर्देश पर पहले से जांच प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए कलेक्टर द्वारा एक समिति का गठन किया गया है। इसी बीच समाजसेवी अमिताभ अग्निहोत्री ने मामले में नए तथ्य और सवाल उठाते हुए अपर जिला मजिस्ट्रेट सुमित कुमार पांडे को ज्ञापन सौंपकर मांग की है।
मर्जर एग्रीमेंट को जांच का आधार बनाने की मांग
उन्होंने एडीएम को दिए ज्ञापन में कहा है कि भारत सरकार और नवाब हमीदुल्ला खान के बीच 29 अप्रैल 1949 को हुए मर्जर एग्रीमेंट की प्रति के आधार पर संपत्तियों की जांच कराई जानी चाहिए। एग्रीमेंट में सरकारी भूमि और नवाब परिवार की निजी संपत्तियों का अलग-अलग विवरण दर्ज है। मांग की गई है कि इसी सूची को आधार बनाकर यह तय किया जाए कि कौन-सी संपत्तियां सरकारी और कौन-सी निजी हैं।
1370 एकड़ भूमि और पांच प्रमुख लोकेशन पर कानूनी पेच
कोहेफिजा, नयापुरा, हलालपुर सहित शहर के कई क्षेत्रों में स्थित नवाबी संपत्तियों को लेकर कानूनी विवाद बना हुआ है। ज्ञापन में बताया गया है कि सैफ अली खान ने पूर्व में उच्च न्यायालय में दायर एक मामले में भोपाल की लगभग 1370 एकड़ भूमि को नवाब परिवार की संभावित निजी संपत्ति बताया था। अब जांच समिति से इन जमीनों की वर्तमान स्थिति और कानूनी दर्जे को स्पष्ट करने की मांग की गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही विवादित संपत्तियों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
