मध्य प्रदेश सरकार ने खाद वितरण में पारदर्शिता के लिए ‘हाइब्रिड मोड’ लागू किया है। वहीं ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द की स्लॉट बुकिंग 10 अगस्त और खरीद की तारी…और पढ़ें
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HighLights
- मध्य प्रदेश सरकार ने खाद वितरण के लिए ‘हाइब्रिड मोड’ लागू किया है
- इसके तहत आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, रजिस्टर में पूरा ब्योरा दर्ज करना होगा
- उड़द की बिक्री के लिए स्लॉट बुकिंग की तारीख बढ़ाकर 10 अगस्त 2कर दी गई
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश सरकार के किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग ने प्रदेश के किसानों के हित में दो महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। एक ओर जहां खाद (खाद) वितरण को पारदर्शी बनाने के लिए ‘हाइब्रिड मोड’ लागू किया गया है। वहीं दूसरी ओर ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द के खरीद की अंतिम तारीख बढ़ाकर किसानों को बड़ी राहत दी गई है।
1. 30 जुलाई से लागू हुआ हाइब्रिड मोड, खाद वितरण में ट्रांसपेरेंसी पर जोर
खाद वितरण को सुगम और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए राज्य में 30 जुलाई से हाइब्रिड मोड लागू कर दिया गया है। कृषि विकास विभाग के उप संचालक उमेश कुमार कटहरे ने बताया कि इस नई व्यवस्था के तहत-
- दस्तावेज और रिकॉर्ड अनिवार्य: अब सभी खाद विक्रेताओं को किसानों को खाद बेचते समय उनके आधार कार्ड की फोटोकॉपी, मोबाइल नंबर और कंपनीवार खाद की मात्रा का पूरा ब्योरा एक निर्धारित रजिस्टर में दर्ज करना होगा।
- पोर्टल पर एंट्री: रजिस्टर में दर्ज यह जानकारी बाद में सरकारी पोर्टल पर अपलोड की जाएगी।
- विक्रेताओं को 30 जुलाई तक की ई-विकास प्रणाली का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। यह व्यवस्था आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगी।
2. मूंग-उड़द उपार्जन: 10 अगस्त तक स्लाट बुकिंग और 20 अगस्त तक खरीद
प्राइस सपोर्ट स्कीम के तहत ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द बेचने वाले किसानों के लिए राज्य शासन ने समय-सीमा बढ़ा दी है-
- स्लाट बुकिंग: किसान अब 10 अगस्त तक अपना स्लाट बुक कर सकेंगे।
- खरीद की अंतिम तिथि: सरकारी केंद्रों पर खरीद की प्रक्रिया अब 20 अगस्त तक जारी रहेगी।
- दूसरा स्लाट (Second Slot) बुकिंग: जिन किसानों ने 30 जुलाई तक अपनी उपज बेच दी है, उन्हें ई-उपार्जन पोर्टल पर दोबारा स्लाट बुक करने की सुविधा भी दी गई है।
फसल उपार्जन नीति में आंशिक संशोधन
विपणन वर्ष 2026-27 की उपार्जन नीति में संशोधन करते हुए राज्य सरकार ने तय किया है कि मूंग के कुल उत्पादन का अधिकतम 60 प्रतिशत तक ही उपार्जन किया जाएगा। उड़द के कुल उत्पादन का अधिकतम 25 प्रतिशत तक सरकारी स्तर पर उपार्जन किया जाएगा।
