मंडला में वन विभाग के बाबू श्वेतांक चौरसिया के घर ईओडब्ल्यू ने छापा मारा। तलाशी में दुकान, नकदी, सोना-चांदी, वाहन और बैंक खातों समेत कई संपत्तियां मिल…और पढ़ें

HighLights
- ईओडब्ल्यू ने वन विभाग बाबू के घर छापा मारा।
- कार्रवाई में करीब 50 लाख रुपये कीमत की दुकान मिली।
- पांच लाख नकद और चार किलो चांदी मिली।
नईदुनिया प्रतिनिधि, मंडला। वन विभाग मंडला में पदस्थ बाबू श्वेतांक चौरसिया के राजराजेश्वरी वार्ड स्थित घर पर बुधवार को आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो की 14 सदस्यीय टीम ने छापा मारा।
आय से अधिक संपत्ति की शिकायत पर हुई इस कार्रवाई में अब तक करीब 50 लाख रुपये कीमत की दुकान, 5 लाख रुपये नकद, लगभग चार किलो चांदी, करीब 200 ग्राम सोने के आभूषण और तीन चारपहिया वाहन मिलने की जानकारी सामने आई है। टीम बैंक खातों, लॉकर, एलआईसी पॉलिसियों और अन्य संपत्तियों की भी जांच कर रही है।
आय करीब 50 लाख बताई गई
- प्रारंभिक जांच के अनुसार श्वेतांक चौरसिया की करीब 20 साल की नौकरी में वैध आय लगभग 50 लाख रुपये के आसपास होनी चाहिए। इसके मुकाबले उसके पास बड़ी मात्रा में चल-अचल संपत्ति मिलने की बात सामने आई है।
- ईओडब्लू ने पहले गुप्त रूप से कराई प्रारंभिक जांच में आय से करीब 300 प्रतिशत अधिक संपत्ति पाया था। हालांकि तलाशी और दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक संपत्ति और आय का अंतर स्पष्ट हो सकेगा।
दुकान, वाहन और आभूषण मिले
तलाशी के दौरान टीम को करीब 50 लाख रुपये कीमत की दुकान, 5 लाख रुपये नकद, चार किलो चांदी और 200 ग्राम सोने के आभूषण मिलने की जानकारी है। इसके अलावा तीन चारपहिया वाहन, चार बैंक खाते और एलआईसी की पॉलिसियां भी जांच के दायरे में हैं। अधिकारियों द्वारा संपत्तियों से संबंधित दस्तावेजों और बैंक लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है।
पत्नी के ब्यूटी पार्लर की भी जांच
- जांच में श्वेतांक चौरसिया की पत्नी के ब्यूटी पार्लर की जानकारी भी सामने आई है। ईओडब्लू टीम पार्लर से संबंधित आय और अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। टीम यह पता लगाने में जुटी है कि अब तक सामने आई संपत्तियां किस आय के स्रोत से अर्जित की गई हैं।
- आय से अधिक संपत्ति की शिकायत के बाद ईओडब्लू की टीम ने राजराजेश्वरी वार्ड स्थित आवास पर कार्रवाई शुरू की, जिसमें डीएसपी मंजीत सिंह, डीएसपी स्वर्णजीत सिंह धामी सहित टीम सुबह से तलाशी अभियान में जुटी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कुल कितनी संपत्ति मिली और उसमें से कितनी संपत्ति आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक है।
