नीट यूजी 2026 पेपर लीक में एजेंसियों ने शुभम खैरनार को नासिक से पकड़ा है और वह सीहोर के एक विश्वविद्यालय में बीएएमएस की पढ़ाई कर चुका है। इस गिरफ्तारी …और पढ़ें

HighLights
- हर बार पेपर लीक से जुड़ रहा भोपाल का नाम
- कई प्रदेशों ने यहां से पकड़े हैं आरोपित
- नीट यूजी पेपर लीक में गिरफ्तारी के बाद फिर चर्चा
मिथिलेश मिश्र, नईदुनिया, भोपाल। नीट यूजी 2026 पेपर लीक में एजेंसियों ने जिस शुभम खैरनार को नासिक से पकड़ा है, वह सीहोर के एक विश्वविद्यालय में बीएएमएस की पढ़ाई कर चुका है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उसके इस क्षेत्र में कैसे नटवर्क बने थे, लेकिन इस गिरफ्तारी ने भोपाल को फिर से चर्चा में ला दिया है। वजह, हर बार पेपर लीक के तार किसी न किसी तरह भोपाल से जुड़ रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा, यूपी आरओ-एआरओ परीक्षा, राजस्थान और हरियाणा की प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक में बार-बार भोपाल कनेक्शन सामने आया है।
फरवरी 2024 में उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हुआ था। स्पेशल टास्क फोर्स ने अप्रैल में नोएडा से राजीव नयन मिश्रा नाम के एक व्यक्ति को पकड़ा था। मूल रूप से प्रयागराज का यह व्यक्ति 10-12 वर्षों से भोपाल में रह रहा था और पूर्व में कई परीक्षाओं के पेपर लीक में संलिप्त रहा। पूछताछ में सामने आया कि मिश्रा के गिरोह ने ही अहमदाबाद में ट्रांसपोर्ट कंपनी के वेयरहाउस से पेपर लीक किए थे। गोपनीयता के लिए पेपर किसी को बेचा नहीं गया, बल्कि रीवा के एक रिसार्ट में डील वाले अभ्यर्थियों को बुलाकर उन्हें प्रश्न और उसके उत्तर रटवाए गए। इसके लिए एक-एक व्यक्ति से सात-आठ लाख रुपये लिए गए थे।
फरवरी में ही यूपी सचिवालय में समीक्षा अधिकारी-सहायक समीक्षा अधिकारी (आरओ-एआरओ) परीक्षा का पेपर लीक हुआ। जांच में पता चला कि इस परीक्षा का पेपर भोपाल के प्रिंटिंग प्रेस में छपा था। शक की सुई फिर राजीव नयन पर घूमी। पूछताछ में पता चला कि राजीव के नेटवर्क ने ही प्रिंटिंग प्रेस के मेकेनिकल इंजीनियर सुनील रघुवंशी की मदद से पेपर लीक किया था। पुलिस सुनील को गिरफ्तार कर ले गई। इससे पहले यह गिरोह 2021 का यूपी टेट, 2023 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत स्टाफ नर्स की संविदा भर्ती, हरियाणा, झारखंड, बिहार की कई परीक्षाओं के पेपर लीक कर चुका था।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक राजीव नयन मिश्रा 2010 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने भोपाल आया था। उसने उसी संस्थान से पढ़ाई की है, जहां से नीट यूजी पेपर लीक का आरोपित शुभम बीएएमएस करने आया था। यहां उसकी मुलाकात सुभाष प्रकाश, अतुल वत्स, तरुणेश अजारिया जैसे लोगों से हुई जो स्थानीय इंजीनियरिंग और प्रबंधन संस्थानों में पैसे लेकर प्रवेश दिलाने और बाद में पेपर लीक का धंधा करते थे। राजीव नयन ने एक कंसल्टेंसी एजेंसी के आवरण के जरिए वर्षों तक यह धंधा चलाया। हर बार जेल से छूटने के बाद यह गिरोह ताकतवर होता गया था।
यूपी के एक कुख्यात पेपर माफिया बेदीराम ने 2012 के मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा का प्री और मेन्स दोनों पेपर लीक करा दिया था। यह पेपर आगरा के प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ था। खुलासा हुआ तब तक साक्षात्कार बाकी थे। पता चला कि इस गिरोह की पैठ भोपाल, इंदौर और मंदसौर में थी। उन्हीं संपर्कों के जरिए उन्हें प्रिंटिंग प्रेस का पता चला था। पुलिस आयुक्त भोपाल संजय कुमार कहते हैं कि पेपरलीक के मामलों में यदि किसी दूसरे राज्य की पुलिस संपर्क करती है तो उनके साथ सहयोग किया जाता है।
