Harisingh Gour Central University: निलंबन आदेश में कहा गया है कि मामले में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं और अब अनुशासनात्मक प्राधिकारी द्वारा विभागीय…और पढ़ें

HighLights
- फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट के बाद।
- विश्वविद्यालय प्रशासन ने की बड़ी कार्रवाई।
- एससी आरक्षित पद पर नियुक्ति का मामला।
नवदुनिया प्रतिनिधि, सागर। हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय में जाति प्रमाण पत्र को लेकर चल रहे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने बिजनेस मैनेजमेंट विभाग प्रोफेसर श्री भगवत को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उनकी नियुक्ति के दौरान एससी वर्ग के लिए आरक्षित पद पर प्रस्तुत किए गए अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र की वैधता पर उठे सवालों के बाद की गई है। निलंबन आदेश में कहा गया है कि मामले में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं और अब अनुशासनात्मक प्राधिकारी द्वारा विभागीय कार्रवाई शुरू की जाएगी।
विश्वविद्यालय द्वारा मामले में गठित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है। कमेटी ने उपलब्ध दस्तावेजों और रिकार्ड की जांच के बाद कई महत्वपूर्ण निष्कर्ष रिपोर्ट में शामिल किए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार उत्तरप्रदेश गोरखपुर निवासी प्रो. भगवत की नियुक्ति 16 अप्रैल 2005 को अनुसूचित जाति आरक्षित पद पर हुई थी। हालांकि, रिकार्ड में सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध स्थाई एससी प्रमाण पत्र नहीं मिला।
इतना ही नहीं उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र के संबंधित जारीकर्ता प्राधिकारी के रिकार्ड से भी पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ से कहा गया है कि यह प्रमाण पत्र यहां से जारी नहीं हुआ है।
यूपी में ओबीसी वर्ग में आने का दावा
कमेटी की रिपोर्ट में सक्षम अधिकारियों से प्राप्त सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रो. भगवत उत्तर प्रदेश की बिंद समुदाय से संबंधित हैं, जिसे वहां अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में रखा गया है। ऐसे में कमेटी ने माना है कि एससी आरक्षित पद पर उनकी नियुक्ति अमान्य या गलत दावे के आधार पर प्राप्त की गई है। कमेटी ने मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश की है।
डीन पद पर होने से रिकार्ड प्रभावित होने की आशंका
विश्वविद्यालय प्रशासन ने निलंबन के पीछे यह भी तर्क दिया है कि प्रो. भगवत वर्तमान में स्कूल ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट के डीन हैं। ऐसे में पद पर बने रहने से गवाहों को प्रभावित करने, सरकारी-विश्वविद्यालय रिकार्ड में हस्तक्षेप करने अथवा निष्पक्ष विभागीय जांच को प्रभावित करने की आशंका हो सकती है। फिलहाल निलंबन आदेश के अनुसार अंतिम निर्णय विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद द्वारा लिया जाएगा। जांच पूरी होने तक प्रो. भगवत का मुख्यालय डा. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर रहेगा।
मुझे इस मामले में कभी भी आधिकारिक रूप से पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया। 30 जुलाई से जांच कमेटी गठित कर 3 अगस्त को फाइनल रिपोर्ट समिट कर दी गई। यह पूरी कार्रवाई पूरी प्रतिशोधत्मक है। कुलपति अपने निज स्वार्थ से चलते यह कर रहे हैं । मैं इस पूरे मामले में हाईकोर्ट जबलपुर की शरण लूंगा।
प्रोफेसर श्री भगवत, डीन, स्कूल आफ कामर्स एंड मैनेजमेंट, केंद्रीय विश्वविद्यालय
