नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। एथनाॅल उत्पादन के लिए एफसीआई द्वारा आवंटित चावल की सप्लाई को लेकर जबलपुर में भी गड़बड़ी सामने आई है। एफसीआई (भारतीय खाद्य निगम) ने वेयरहाउस से बड़ी मात्रा में चावल एथनाॅल प्लांट के नाम पर उठवाया, लेकिन उसका पूरा स्टाक निर्धारित प्लांट तक नहीं पहुंचा।
गेट से बाहर जाने के बाद चावल या धान पर हमारा कोई अधिकार नहीं
सूत्रों के मुताबिक यह चावल रास्ते में ही गंतव्य की बजाए दूसरे स्थानों पर खपाया दिया गया। अब इस फर्जीवाड़े में शहर के कुछ राइस मिलरों के साथ ट्रांसपोर्टर भी शामिल है। इधर एफसीआइ के अधिकारियों से जब इस बारे में पूछा गया तो उनका साफ कहना था कि गेट से बाहर जाने के बाद चावल या धान पर हमारा कोई अधिकार नहीं होता है।
शहपुरा से उठा, प्लांट पहुंचने से पहले गायब
इस पूरे प्रकरण से जुड़े एफसीआई के अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। दरअसल एफसीआई ने एथनाॅल उत्पादन के लिए जबलपुर क्षेत्र के शहपुरा के जिस वेयरहाउस से हजारों मीट्रिक टन चावल आवंटित किया था, वहां से पूरा स्टाक एथनाॅल प्लांट तक पहुंचना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
अब एफसीआइ के अधिकारी, इसको लेकर बच रहे हैं
सूत्रों की माने तो उठाए गए चावल का बड़ा हिस्सा प्लांट से गायब हो गया। अब एफसीआई के अधिकारी, इसको लेकर बच रहे हैं। उनका कहना है कि गेट के बाहर जान के बाद चावल पर उनका कोई अधिकार नहीं है। अब संभावना जताई जा रही है कि इस स्टाक को रिकॉर्ड में परिवहन दिखाकर माल को अन्य राइस मिल और कुछ को खुले बाजार में बेचा गया।
फिर परिवहन में गड़बड़ी
गौरतलब है कि दो साल पूर्व तत्कालीन कलेक्टर दीपक सक्सेना ने जिले में धान परिवहन को बड़ा घोटाला पकड़ा था, जिसमें बाहर और शहर, दोनों के मिलर, परिवहन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हुई। ऐसा ही एफसीआइ से परिवहन किए गए चावल में हुआ। केंद्रीय नियंत्रण में रहने की वजह से एफसीआई के अधिकारियों ने कई जानकारी को गोपनीय रखा।
ट्रांसपोर्ट चालान और प्लांट में प्राप्ति का रिकॉर्ड में भी हेरफेर किया गया
चावल के परिवहन के दौरान निगरानी व्यवस्था पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं परिवहन से जुड़े दस्तावेज, वेयरहाउस से जारी गेट पास, ट्रांसपोर्ट चालान और प्लांट में प्राप्ति का रिकॉर्ड में भी हेरफेर किया गया, जिसका न तो मिलान किया गा और न ही जांच की गई। सूत्र बताते हैं इनकी जांच से ही पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा होगा।
मिलर, ट्रांसपोर्ट भी शामिल
चावल को गंतव्य तक पहुंचाने की बजाए बीच से गायब किया गया। इस पूरे प्रकरण में किए गए फर्जीवाड़े में केवल ट्रांसपोर्टर ही नहीं, बल्कि एफसीआई से लेकर वेयरहाउस प्रबंधन, राइस मिलर और परिवहन एजेंसियों की भी भूमिका संदिग्ध आई है, लेकिन इस प्रकरण की जांच करने की बजाए इसे दबा दिया गया।
बताया जाता है कि कुछ में तो पिछली बार की तरह कागजों पर परिवहन पूरा दिखा गया, जबकि परिवहन हुआ ही नहीं। वहीं चावल का परिवहन करने वाले ट्रकों में जीपीएस सिस्टम से लैंस करना अनिवार्य हैं, लेकिन हकीकत यह रही कि यहां भी कई वाहनों में जीपीएस सिस्टम ही नहीं था।
सवाल पर बवाल
- एफसीआई के शहपुरा वेयरहाउस से एथनाॅल प्लांट के लिए निकला चावल रास्ते से गायब।
- बड़ी मात्रा में चावल का उठान हुआ, बावजूद इसके स्टाक प्लांट तक नहीं पहुंचा।
- राइस मिलर, ट्रांसपोर्टर और संबंधित अधिकारियों की भूमिका अब जांच के दायरे में।
- परिवहन रिकॉर्ड, गेट पास और प्लांट रिसीविंग का मिलान जरूरी।
- जीपीएस ट्रैकिंग व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल।
एफसीआई का जिम्मेदारी सिर्फ परिसर तक की ही हाेती है। इसके बाद गेट के बाहर जाने वाले माल पर नहीं। हालांकि जबलपुर से जुड़ी ऐसी कोई शिकायत अभी तक हमारे पास नहीं आई है।
सौरभ कुमार, डीएम, एफसीआइ, जबलपुर
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