सेवा के आखिरी पड़ाव में किए गए स्थानांतरण के केस पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कर्मचारी को राहत देते हुए स्पष्ट कर दिया कि कर्मचारी की आपत्ति पर पहले वि…और पढ़ें

HighLights
- एक केस में रिटायरमेंट से ठीक पहले तबादले पर हाई कोर्ट ने रोक लगाई है
- शिक्षिका को बड़ी राहत, अदालत ने कहा- कर्मचारी की आपत्ति पर पहले हो कानूनी फैसला
- कमल जान्हा ने 16 जून 2026 के स्थानांतरण आदेश को चुनौती दी थी
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। सेवा के आखिरी पड़ाव में किए गए स्थानांतरण पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राहत देते हुए स्पष्ट कर दिया कि कर्मचारी की आपत्ति पर पहले विधिसम्मत निर्णय लिया जाए। कोर्ट ने अनूपपुर की प्राथमिक शिक्षिका कमल जान्हा के तबादले पर अंतरिम राहत देते हुए उन्हें फिलहाल पुराने स्कूल में ही कार्यरत रखने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मोहन लाल शर्मा, शिवम शर्मा व जितेंद्र गर्ग ने पैरवी की।
न्यायमूर्ति विशाल धगत की एकलपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए संबंधित सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के लंबित अभ्यावेदन पर 30 दिनों के भीतर कारणयुक्त और स्पष्ट आदेश पारित किया जाए। तब तक शिक्षिका अपने वर्तमान पदस्थापना स्थल शासकीय संदीपनी स्कूल, पचखुरा, विकासखंड कोतमा, जिला अनूपपुर में कार्य करती रहेंगी।
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शिक्षिका ने 16 जून को दी थी आदेश को चुनौती
अनूपपुर निवासी 61 वर्षीय कमल जान्हा ने 16 जून 2026 के स्थानांतरण आदेश को चुनौती दी थी। उनका तबादला कोतमा से शासकीय प्राथमिक विद्यालय अमौदा, विकासखंड पुष्पराजगढ़ किया गया था। याचिका में कहा गया कि उनकी सेवानिवृत्ति में केवल 12 माह शेष हैं। ऐसे समय स्थानांतरण से पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति संबंधी प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं। यह भी बताया गया कि इस संबंध में दिया गया अभ्यावेदन अब तक लंबित है।
