नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। भारतीय रेलवे के बड़े निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में देरी रोकने के लिए रेलवे बोर्ड ने अधिकारियों की पोस्टिंग और कामकाज से जुड़ी नई व्यवस्था लागू की है। अब कंस्ट्रक्शन विंग में पोस्टिंग सिफारिश या किसी की पहुंच के आधार पर नहीं होगी। अधिकारियों को विशेष पोर्टल पर आवेदन करना होगा। इसके बाद उनकी योग्यता, अनुभव और काम के आधार पर इंटरव्यू और तकनीकी परीक्षा होगी।
इसका उद्देश्य प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करना और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करना है। एक पद के लिए पांच अधिकारी होंगे दावेदार खाली पदों के मुकाबले पांच गुना अधिकारियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों वाला सेंट्रल सिलेक्शन बोर्ड बनेगा। बोर्ड अधिकारियों के अनुभव, योग्यता और कार्य प्रदर्शन का मूल्यांकन करेगा।
कंस्ट्रक्शन विंग के लिए होगा चयन
इसके आधार पर योग्य अधिकारियों का चयन कंस्ट्रक्शन विंग के लिए किया जाएगा। पोर्टल पर देना होगा पूरा रिकार्ड कंस्ट्रक्शन विंग में काम करने के इच्छुक अधिकारियों को रेलवे के विशेष पोर्टल पर आवेदन करना होगा। इसमें उन्हें अपना बायोडाटा, अब तक का काम, महत्वपूर्ण उपलब्धियां और किए गए प्रशिक्षण या कोर्स की जानकारी देनी होगी। इसी रिकार्ड के आधार पर अधिकारियों को चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।
दो साल का कूलिंग-ऑफ कंस्ट्रक्शन संगठन में एक कार्यकाल पूरा करने के बाद अधिकारी तुरंत दोबारा वहां पोस्टिंग नहीं ले सकेंगे। दोबारा नियुक्ति से पहले दो साल का कूलिंग-आफ जरूरी होगा। इससे अधिकारियों को अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने का अवसर मिलेगा और एक ही जगह लंबे समय तक रहने की व्यवस्था पर रोक लगेगी। एआई और कवच की ट्रेनिंग के बाद परीक्षा नई तकनीक के इस्तेमाल के लिए अधिकारियों की ट्रेनिंग भी जरूरी कर दी गई है। गति शक्ति यूनिवर्सिटी या सीटीआई में दो से तीन सप्ताह का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
परीक्षा पास करनी होगी जरूरी
इसमें एआई, आईटी, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, डिजिटल ट्विन, हाईस्पीड ट्रैक, टनलिंग और कवच जैसी आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद परीक्षा पास करना अनिवार्य होगा। पांच साल का कार्यकाल, हर महीने होगा मूल्यांकन प्रोजेक्ट के बीच अधिकारियों के बार-बार तबादले रोकने के लिए न्यूनतम कार्यकाल पांच साल तय किया गया है। बेहतर प्रदर्शन पर इसे सात साल तक बढ़ाया जा सकेगा।
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अधिकारी हर महीने केआरए तैयार करेंगे और हर तीन महीने में वरिष्ठ अधिकारी उनके काम की समीक्षा कर रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजेंगे। दुर्गम क्षेत्रों में तैनात अफसरों को राहत पहाड़, जंगल और दूरदराज के क्षेत्रों में तैनात अधिकारियों को विशेष सुविधाएं मिलेंगी। परिवार के लिए पिछली पोस्टिंग का सरकारी आवास रखने की अनुमति होगी। दूरस्थ साइट पर प्रीफैब्रिकेटेड घर और साइट आफिस मिलेंगे।
पांच साल के बाद चुन सकेंगे जोनल रेलवे
कंस्ट्रक्शन विंग में पांच साल सफल सेवा के बाद अधिकारी अपनी पसंद के तीन जोनल रेलवे चुन सकेंगे। जमीन और वन मंजूरी के लिए आईएफएस अधिकारी रेलवे प्रोजेक्ट्स में जमीन अधिग्रहण और वन मंजूरी की देरी दूर करने के लिए हर जोनल रेलवे में वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी तैनात किए जाएंगे। ये अधिकारी राज्य सरकार, वन और राजस्व विभाग से समन्वय कर मंजूरियों की प्रक्रिया तेज करेंगे। इससे जमीन व जंगल से जुड़े मामलों के कारण प्रोजेक्ट्स अटकने की समस्या कम होगी।
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