शहर के ट्रैफिक सिग्नलों के बंद और ब्लिंकिंग मोड में रहने से यातायात व्यवस्था प्रभावित होने पर दायर जनहित याचिका में हाई कोर्ट एकीकृत संचालन व्यवस्था क…और पढ़ें

HighLights
- 29 जुलाई तक सरकार से मांगी स्पष्ट राय
- बोला- समन्वय नहीं तो एक ही संस्था संभालें
- शहर के 21 ट्रैफिक सिग्नलों में से 20 चालू हैं
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। शहर के ट्रैफिक सिग्नलों की बदहाल व्यवस्था पर हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार से पूछा है कि जब नगर निगम, स्मार्ट सिटी और यातायात विभाग के बीच जिम्मेदारी बंटी होने से व्यवस्था प्रभावित हो रही है, तो सभी ट्रैफिक सिग्नलों के संचालन की जिम्मेदारी किसी एक एजेंसी को सौंपने पर विचार क्यों नहीं किया जाता।
29 जुलाई तक सरकार से मांगी स्पष्ट राय
प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक और न्यायाधीश बीपी शर्मा की युगलपीठ ने सरकार को इस संबंध में स्पष्ट प्रस्ताव या राय 29 जुलाई को अगली सुनवाई पर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
शहर के 21 ट्रैफिक सिग्नलों में से 20 चालू हैं
सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने अदालत को बताया कि शहर के 21 ट्रैफिक सिग्नलों में से 20 चालू हैं। केवल दमोह नाका का सिग्नल फ्लाईओवर निर्माण कार्य के कारण बंद है। इस पर कोर्ट ने कहा कि यदि अलग-अलग एजेंसियों के कारण समन्वय में दिक्कत आ रही है तो एकीकृत व्यवस्था पर गंभीरता से विचार किया जाए।
कई सिग्नल लंबे समय तक बंद रहने से जाम
यह जनहित याचिका नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डाॅ. पीजी नाजपांडे व सामाजिक कार्यकर्ता रजत भार्गव ने दायर की है। उनकी ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पक्ष रखते हुए कहा कि शहर के कई सिग्नल लंबे समय तक बंद रहने से जाम की समस्या बढ़ी है।
सभी सिग्नलों को शीघ्र सुचारु करने की मांग
कैमरों की निगरानी और ई-चालान व्यवस्था प्रभावित होने से नियम तोड़ने वालों पर अंकुश नहीं लग पा रहा, वहीं शासन को राजस्व की हानि भी हो रही है। याचिका में नगर निगम, स्मार्ट सिटी और यातायात विभाग के बीच समन्वय के अभाव को समस्या की मूल वजह बताते हुए सभी सिग्नलों को शीघ्र सुचारु करने की मांग की गई है।
