नर्मदा के आंचल को पवित्र व निर्मल करने के लिए शासन ने करोड़ों रुपये खर्च कर दिए, किंतु नतीजा कुछ नहीं निकला। रुपये तो खर्च हो गए, पर परिणाम पर किसी का …और पढ़ें

HighLights
- 15 करोड़ रुपये की सीवरेज योजना पर सवाल, श्रद्धालु प्रदूषित पानी में स्नान को मजबूर
- शासन की तमाम नीतियां व योजनाएं विफल साबित हो रही हैं
- नर्मदा आज भी प्रदूषण का दर्द झेल रही है और मात्र कागजों पर ही पवित्र हो पाई है
राकेश कुमरावत, नईदुनिया न्यूज, धरमपुरी। प्रदेश की जीवनदायिनी कही जाने वाली मां नर्मदा के पवित्र जल को निर्मल रख पाने में शासन की तमाम नीतियां व योजनाएं विफल साबित हो रही हैं।
नर्मदा के आंचल को पवित्र व निर्मल करने के लिए शासन ने करोड़ों रुपये खर्च कर दिए, किंतु नतीजा कुछ नहीं निकला। नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए रुपये तो खर्च हो गए, पर परिणाम पर किसी का ध्यान नहीं है। इसके फलस्वरूप नर्मदा आज भी प्रदूषण का दर्द झेल रही है और मात्र कागजों पर ही पवित्र हो पाई है।
प्रदेश सरकार ने करीब 15 करोड़ रुपये खर्च कर धरमपुरी में मल-जल योजना (सीवरेज) का कार्य किया। योजना के पूर्व हुए सर्वे में धरमपुरी के नर्मदा तट के जल को सबसे ज्यादा प्रदूषित माना गया था। इसके आधार पर प्रदेश सरकार ने पहले ही चरण में जिन पांच स्थानों का मल-जल योजना के लिए चयन किया था, उसमें धरमपुरी का नाम भी शामिल था। जिसका वर्चुअल शुभारंभ प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया था।
नगर का सारा गंदा पानी सीधे नर्मदा में पहुंच रहा था, इसलिए नर्मदा नदी प्रदूषित होना तय थी। अब जबकि सीवरेज लाइन पूरी तरह पूर्ण हो चुकी है, ट्रीटमेंट प्लांट ने कार्य करना भी शुरू कर दिया है, उसके बाद भी नर्मदा नदी में गंदा पानी जाना इस योजना पर प्रश्न खड़ा कर रहा है।
मात्र हाथी के दांत साबित हो रहा है एसटीपी
नगर के वार्ड एक खुजावा में खुज नदी के किनारे पर बना सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) यानी अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र मात्र हाथी के दांत की तरह दिखावा मात्र बनकर रह गया है। कोई भी अधिकारी या कोई दल यहां आता है, तो इस प्लांट को दिखाकर केवल वाहवाही लूटी जाती है, जबकि वास्तविक में इस प्लांट से ही गंदा व बदबूदार पानी खुज नदी में छोड़ा जा रहा है, जहां से होकर सीधे नर्मदा नदी को प्रदूषित कर रहा है, लेकिन यह किसी को दिखाई नहीं दे रहा है। शासन-प्रशासन सिर्फ अपने हाथों से अपनी ही पीठ थपथपाने में लगा हुआ है।
कई गंदे नाले का पानी सीधे मिल रहा नर्मदा में
पूरे नगर में कई स्थानों पर गंदे नालों का बदबूदार पानी सीधे नर्मदा नदी में पहुंच रहा है। नगर के स्नान घाटों के पास ही गंदा पानी मिल रहा है। इसके कारण श्रद्धालुओं का स्नान करना भी मुश्किल हो रहा है, किंतु न किसी जिम्मेदार अधिकारी को यह दिख रहा है और न ही समाजसेवियों व न मां नर्मदा के भक्तों और न ही नर्मदा का आशीर्वाद लेने वाले जनप्रतिनिधियों को। आस्था के वशीभूत श्रद्धालु गंदे पानी में ही डुबकी लगा रहे हैं। नगर के शीतला माता घाट पर एसटीपी सहित नगर के गंदे नालों का पानी खुज नदी से होकर नर्मदा में पहुंच रहा है। वहीं पेढ़ी घाट के आसपास से भी कई नालों का पानी सीधा नर्मदा को अपवित्र कर रहा है। नगर के इन दोनों स्थानों पर ही लोग गंदे पानी में स्नान करने को मजबूर हैं। इसके अलावा भी कई स्थानों से गंदा पानी नर्मदा में पहुंच रहा है।
क्यों कॉल कर रहे हैं
इस संबंध में एसटीपी प्लांट के प्रभारी सुमित वसुनिया से कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, किंतु उन्होंने एक बार भी कॉल रिसीव नहीं किया। वहीं प्लांट पर अस्थाई रूप से पदस्थ एक कर्मचारी से फोन करवा कर पूछा गया कि नईदुनिया के प्रतिनिधि कॉल क्यों कर रहे हैं।
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