मामला भोपाल में राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) द्वारा 61.20 किलोग्राम तरल मेफेड्रोन की बरामदगी से जुड़ा है। सूरत निवासी अंजलि सिंह राजपूत, महफूज खान …और पढ़ें

HighLights
- तस्करी केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं
- ऐसे मामलों में उदार दृष्टिकोण का कोई आधार नहीं
- दस्तावेजों के आधार पर आरोपितों की संलिप्तता बताई
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने अपनी तल्ख टिप्पणी में कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर सीधा हमला है।
नियमित जमानत अर्जियां निरस्त
इसी के साथ कोर्ट ने तुर्की से संचालित बताए जा रहे अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ तस्करी गिरोह से जुड़े तीन आरोपियों की नियमित जमानत अर्जियां निरस्त कर दीं।
तस्करी नेटवर्क में सक्रिय भूमिका का संकेत देते हैं
कोर्ट ने कहा कि प्रथमदृष्टया उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और वित्तीय साक्ष्य आरोपितों की संगठित अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क में सक्रिय भूमिका का संकेत देते हैं। ऐसे मामलों में उदार दृष्टिकोण अपनाने का कोई आधार नहीं है।
61.20 किलोग्राम तरल मेफेड्रोन की बरामदगी का मामला
मामला भोपाल में राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) द्वारा 61.20 किलोग्राम तरल मेफेड्रोन की बरामदगी से जुड़ा है। कोर्ट ने सूरत निवासी अंजलि सिंह राजपूत, महफूज खान और वीरन रजनीकांत शाह की जमानत अर्जियां निरस्त कर दीं।
तुर्की से पूरे गिरोह का संचालन कर रहा था
जांच के अनुसार फरार सरगना सलीम डोला उर्फ अर्जुन सर तुर्की से पूरे गिरोह का संचालन कर रहा था। अभियोजन ने हवाला लेनदेन, रासायनिक पदार्थ की आपूर्ति, दूरभाष विवरण, संदेशों के अभिलेख तथा वित्तीय दस्तावेजों के आधार पर आरोपितों की संलिप्तता बताई।
