अदालत ने आरोपित का उत्कृष्ट शैक्षणिक रिकार्ड, उसके विरुद्ध किसी भी प्रकार के आपराधिक इतिहास का अभाव तथा प्रकरण की समग्र परिस्थितियों को ध्यान में रखते…और पढ़ें

HighLights
- बेल्ट घातक हथियार की श्रेणी में नहीं
- नाक पर वार कर गंभीर चोट पहुंचाई थी
- संहिता की गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने अपने एक आदेश में स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया बेल्ट को घातक हथियार की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इसी आधार पर भोपाल के मिसरोद थाना क्षेत्र में दर्ज मारपीट के मामले में बीएएमएस के मेधावी छात्र शमशाद खान को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी।
50 हजार के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया।
न्यायमूर्ति रामकुमार चौबे की एकलपीठ ने आरोपित को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक सक्षम जमानतदार पर रिहा किए जाने का आदेश दिया।
गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया
अभियोजन के अनुसार, एक मिठाई की दुकान पर युवती को लेकर हुए विवाद के दौरान शमशाद खान ने बेल्ट के बक्कल से शिकायतकर्ता की नाक पर वार कर गंभीर चोट पहुंचाई थी। पुलिस ने इस आधार पर भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया।
महिला मित्र के साथ अभद्र व्यवहार से हुई थी
आरोपित की ओर से अधिवक्ता शांतनु तिवारी ने तर्क दिया कि घटना की शुरुआत शिकायतकर्ता द्वारा छात्र की महिला मित्र के साथ अभद्र व्यवहार से हुई थी। इसके बाद दोनों पक्षों में कहासुनी और हाथापाई हुई। यह भी दलील दी गई कि एफआईआर घटना के दो दिन बाद दर्ज की गई, जिससे अभियोजन की कहानी पर संदेह उत्पन्न होता है।
अधिकतम कम गंभीर अपराध का मामला बनता है
बचाव पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट तथा विभिन्न हाई कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि बेल्ट को घातक हथियार नहीं माना जा सकता। इसलिए उपलब्ध तथ्यों के आधार पर गंभीर धारा लागू नहीं होती और अधिकतम कम गंभीर अपराध का मामला बनता है।
